Summer express, कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे बड़ी जल सुरंग (वाटर टनल) का निर्माण पूरा हो गया है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना नर्मदा नदी के जल को महाकोशल क्षेत्र से विंध्य अंचल तक प्राकृतिक बहाव के जरिए पहुंचाने का मार्ग तैयार करेगी। इस सुरंग के जरिए बिना किसी पंप की सहायता के नर्मदा का पानी सोन बेसिन से जुड़कर लाखों किसानों के खेतों तक पहुंचेगा।
करीब 12 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली इस विशाल सुरंग का निर्माण बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत किया गया है। इसके पूरा होने से महाकोशल और विंध्य क्षेत्र के जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा सहित छह जिलों की लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। इसके अलावा करीब 1450 गांवों को इस परियोजना का सीधा लाभ मिलेगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2008 में 799 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी मिली थी। वर्ष 2011 में सुरंग निर्माण का कार्य शुरू हुआ, जिसे 40 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों के चलते यह कार्य लगभग 15 वर्षों में पूरा हो सका। निर्माण के दौरान अमेरिका और जर्मनी की आधुनिक मशीनों का उपयोग किया गया, लेकिन पहाड़ों के भीतर कठिन चट्टानों, पानी के तेज बहाव, मिट्टी धंसने और रेलवे लाइन के नीचे से सुरंग निकालने जैसी कई बाधाओं के कारण परियोजना लगातार विलंबित होती रही।
वर्ष 2022 में सुरंग निर्माण के दौरान बड़ा हादसा भी हुआ था। मशीन का कटर बाहर निकालने के लिए बनाए गए शाफ्ट के धंस जाने से नौ मजदूर उसमें दब गए थे, जिनमें दो श्रमिकों की मौत हो गई थी। लगातार देरी और तकनीकी अड़चनों के कारण परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव के अनुसार, सलैया फाटक से खिरहनी गांव तक पहाड़ों के नीचे बनाई गई यह सुरंग देश की सबसे बड़ी जल सुरंग है। अब सुरंग निर्माण पूरा होने के बाद टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को शाफ्ट के माध्यम से बाहर निकालने का कार्य शुरू किया जा रहा है।
इस परियोजना से कटनी की 21,823 हेक्टेयर, मैहर की 54,227 हेक्टेयर, सतना की 1,04,970 हेक्टेयर, पन्ना की 448 हेक्टेयर, रीवा की 3,084 हेक्टेयर और जबलपुर की लगभग 60 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। सरकार की योजना के अनुसार अक्टूबर माह से नर्मदा का जल विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होगा।
परियोजना के पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को स्लीमनाबाद पहुंचकर जल सुरंग का निरीक्षण करेंगे। वह पड़वार रोड स्थित शाफ्ट स्थल का भी दौरा करेंगे, जहां से सुरंग निर्माण में प्रयुक्त मशीन को बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री स्लीमनाबाद तिराहा स्थित सभा स्थल पर जनसभा को भी संबोधित करेंगे।