चंडीगढ़
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी बैंक घोटाले में चंडीगढ़ व लुधियाना में पांच स्थानों पर छापेमारी कर चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम चंडीगढ़ से जुड़े बैंक खातों में कथित 657 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले की जांच तेज कर दी है।
तलाशी संदिग्ध लाभार्थियों के आवासीय परिसरों, कारोबारी प्रतिष्ठानों और मामले से जुड़े अन्य ठिकानों पर की गई। जांच के दायरे में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े अनुभव मिश्रा और कुछ निजी संस्थाएं भी हैं। सीबीआई के अनुसार, तलाशी के दौरान स्टोरेज ड्राइव, डिजिटल हस्ताक्षर, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
एजेंसी धन हेराफेरी के पूरे रास्ते का पता लगाने और यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर गबन की गई राशि किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंची। सीबीआई ने कहा है कि तलाशी का उद्देश्य जांच में सामने आए संदिग्ध लेनदेन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका को स्पष्ट करना है।
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम से जुड़े मामले में इससे पहले 116 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। जांच में फर्जी सावधि जमा रसीदें बनाने, बैंक खातों के संचालन और मोबाइल नंबर तथा ईमेल आईडी में कथित बदलाव जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। सीबीआई ने अदालत को बताया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका तथा धन के लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
अनुभव मिश्रा की भूमिका जांच के घेरे में
अनुभव मिश्रा नगर निगम के लेखा विभाग से जुड़े रहे हैं और मामले में आरोपी बनाए गए लोगों में शामिल हैं। सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, उनकी भूमिका की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मिश्रा जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं और उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया है। जांच एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही है।