Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला छावनी। अंबाला छावनी की रहने वाली निकिता उर्फ निक्की अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके जाने के बाद 43 बेजुबान कुत्ते आज भी अपने सबसे बड़े सहारे का इंतजार कर रहे हैं। सड़क से घायल और बेसहारा कुत्तों को नया जीवन देने का संकल्प लेने वाली निकिता का 13 जुलाई को साहा के पास हुए सड़क हादसे में निधन हो गया। उनके निधन के बाद अब इन बेजुबानों की देखभाल परिवार और सामाजिक संस्थाओं के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।
चंद्रपुरी क्षेत्र निवासी निकिता ने वर्षों पहले घायल, बीमार और लावारिस कुत्तों की सेवा का बीड़ा उठाया था। वह सड़कों से घायल जानवरों को अपने घर लाकर उनका इलाज कराती थीं, उन्हें भोजन देती थीं और पूरी देखभाल करती थीं। धीरे-धीरे उनका घर 43 कुत्तों का आश्रय स्थल बन गया, जहां कई घायल और पैरालाइज कुत्तों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई थी।
परिजनों के अनुसार निकिता इन बेजुबानों की देखभाल पर हर महीने अच्छी-खासी राशि खर्च करती थीं। उनके जाने के बाद अचानक यह पूरी जिम्मेदारी परिवार पर आ गई है। कुत्तों के भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरतों को पूरा करना अब परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी चुनौती बन गया है।
निकिता की बहन आशा ने बताया कि निकिता इन बेजुबानों को अपने परिवार का हिस्सा मानती थीं। उनकी दिनचर्या का अधिकांश समय इन्हीं की देखभाल में बीतता था। आज भी कई कुत्ते दरवाजे की ओर देखते रहते हैं, मानो उन्हें विश्वास हो कि निकिता वापस आएंगी।
इस बीच सामाजिक संस्था वंदे मातरम दल ने आगे बढ़कर इन बेजुबानों की जिम्मेदारी संभालने का प्रयास शुरू किया है। संस्था के सदस्य प्रतिदिन शेल्टर पहुंचकर कुत्तों के लिए भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कर रहे हैं। साथ ही उनके लिए सुरक्षित और स्थायी आश्रय उपलब्ध कराने की दिशा में भी अभियान चलाया जा रहा है।
संस्था के सदस्य सौरभ ने बताया कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निकिता के जाने के बाद भी इन बेजुबानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। संस्था लोगों से भी अपील कर रही है कि जो परिवार इन कुत्तों को अपनाने में सक्षम हैं, वे आगे आकर इन मासूम जानवरों को नया घर दें।