अंकुर कपूर, अंबाला शहर | हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व अंबाला शहर से कांग्रेस विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी निर्मल सिंह ने जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे छात्रों द्वारा कथित पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर किए जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और उसका उत्तर लाठी, बल प्रयोग अथवा दमन से नहीं बल्कि संवाद, संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण निर्णयों से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश का युवा आज लंबे समय से रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में है। विभिन्न राज्यों में भर्ती परीक्षाओं के कथित पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के विश्वास को गहरा आघात पहुँचाया है। अनेक अभ्यर्थी वर्षों की मेहनत के बाद भी बार-बार परीक्षाएँ रद्द होने और भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब से मानसिक तनाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विभिन्न रिपोर्टों में ऐसे मामलों का उल्लेख हुआ है, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े तनाव के कारण कुछ युवाओं ने आत्महत्या जैसे दुखद कदम भी उठाए। ऐसी परिस्थितियों में सरकार का पहला दायित्व युवाओं के दर्द को समझना होना चाहिए, न कि उनके शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक रोकना।
निर्मल सिंह ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस के अन्य सांसदों एवं नेताओं के साथ जिस प्रकार का पुलिस व्यवहार सामने आया, उसने लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों और छात्रों की आवाज़ को भी बल प्रयोग के माध्यम से दबाने का प्रयास होगा, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर होगा।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम ने देशवासियों को उन अवसरों की भी याद दिलाई है जब किसान आंदोलन, खिलाड़ियों के आंदोलन तथा अन्य जन आंदोलनों के दौरान भी प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर कार्रवाई किए जाने को लेकर व्यापक बहस हुई थी। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान विरोध के अधिकार का सम्मान करने से होती है, न कि असहमति को अपराध की तरह देखने से।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं, महिलाओं अथवा अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ अनुचित व्यवहार, चोटिल होने या गरिमा के प्रतिकूल आचरण की घटनाएँ हुई हैं, तो उनकी निष्पक्ष, समयबद्ध और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लोकतंत्र में किसी भी नागरिक, विशेषकर महिलाओं और युवाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
निर्मल सिंह ने कहा कि संसद जनता की आवाज़ उठाने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। यदि विपक्ष जनहित के मुद्दों को उठाना चाहता है, तो उसे अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती संवाद, जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से आती है, दमन से नहीं।
उन्होंने कहा कि आज के छात्र और युवा ही भारत का भविष्य हैं। उनकी आकांक्षाओं, परिश्रम और सपनों की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के मामलों में कठोर एवं पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, युवाओं के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया जाए तथा ऐसी परिस्थितियाँ बनाई जाएँ जिनसे उनका भविष्य सुरक्षित और विश्वास बहाल हो सके।
निर्मल सिंह ने कहा कि हरियाणा कांग्रेस युवाओं, छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक दायरे में अपना संघर्ष जारी रखेगी और जनहित के मुद्दों को हर मंच पर मजबूती से उठाती रहेगी।