Summer express, बालाघाट | मध्य प्रदेश में एथनॉल प्लांटों के नाम पर सरकारी फोर्टिफाइड चावल के कथित घोटाले की जांच तेज हो गई है। इस मामले में पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रामकिशोर कावरे के बड़े भाई कुमार कावरे और उनके भतीजे अविनाश कावरे से विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद दोनों पर कानूनी शिकंजा कसने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला 3 जून को उस समय सामने आया था, जब बालाघाट में 242 क्विंटल सरकारी फोर्टिफाइड चावल से भरा एक ट्रक पकड़ा गया था। शुरुआती जांच के बाद सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी को सौंप दी। जांच में आशंका जताई गई है कि प्रदेश के 17 जिलों में स्थित 22 एथनॉल प्लांटों के नाम पर करीब 1100 करोड़ रुपये मूल्य का सरकारी चावल निजी राइस मिलों में खपाया गया। इस मामले में मध्य प्रदेश सहित तीन राज्यों के कई राइस मिलर जांच के दायरे में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने बुधवार रात कुमार कावरे और अविनाश कावरे से कई घंटे तक पूछताछ की। वहीं गुरुवार को कुमार कावरे और उनके कारोबारी साझेदार विनोद शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं भी रहीं, हालांकि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि जांच के आधार पर जल्द ही दो राइस मिल संचालकों के खिलाफ भी गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है।
इधर, कुमार कावरे से जुड़ी हर्ष राइस इंडस्ट्री के ब्लैकलिस्ट होने की संभावना भी जताई जा रही है। मामले की गहराई से जांच के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) भोपाल के अधिकारियों की टीम दोबारा बालाघाट पहुंचेगी। इस दौरान चावल के भंडारण, परिवहन, वितरण और रिकॉर्ड का मिलान कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे पहले एफसीआई भोपाल और दिल्ली की विजिलेंस टीमें प्रारंभिक जांच कर चुकी हैं।
जांच एजेंसियां अब राइस मिलों में पहुंचे सरकारी चावल के बदले हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान की भी पड़ताल कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में भुगतान की कुछ कड़ियां छिंदवाड़ा स्थित एवीजे एथनॉल प्लांट से जुड़ी मिली हैं। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला स्पष्ट होने के बाद घोटाले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।