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बांग्लादेश को पंजाब की रेल कोच फैक्टरी ने भेजा तोहफा

समर न्यूज। कपूरथला

पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्टरी यानी आरसीएफ ने अंतरराष्ट्रीय रेल बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। फैक्टरी बांग्लादेश रेलवे के लिए 19 एलएचबी यात्री कोचों का पहला रैक तैयार कर चुकी है, जिसे रवाना कर दिया गया है। यह भारत की ओर से बांग्लादेश को करीब एक दशक बाद यात्री कोचों की आपूर्ति की वापसी भी है। इस रैक में तीन वातानुकूलित स्लीपर, तीन वातानुकूलित चेयर कार, 11 गैर-वातानुकूलित चेयर कार और दो पावर कार शामिल हैं। कोचों को बांग्लादेश रेलवे की जरूरतों के अनुसार डिजाइन में बदलाव करके तैयार किया गया है।
यह परियोजना महज सामान्य कोच आपूर्ति नहीं है, बल्कि आरसीएफ की डिजाइन क्षमता और निर्यात क्षमता का भी प्रदर्शन है। नए कोचों में यूरोपीय मानक ईएन 15227 के अनुरूप दुर्घटना की स्थिति में बेहतर सुरक्षा देने वाला डिजाइन अपनाया गया है। इसके लिए कोच के बॉडी शेल में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा इन कोचों की विद्युत प्रणाली 415 वोल्ट के अनुरूप तैयार की गई है, जबकि भारतीय रेलवे के सामान्य कोचों में 750 वोल्ट की व्यवस्था इस्तेमाल होती है।
{बांग्लादेश की जरूरत के हिसाब से डिजाइन: नए रैक में यात्रियों की सुविधा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। चेयर कार में झुकने वाली सीटें, स्टेनलेस स्टील के आर्मरेस्ट और फुटरेस्ट लगाए गए हैं। सीटों में अलग-अलग स्थिति में पीछे की ओर झुकने की सुविधा है। वातानुकूलित कोचों में पंखे, सीसीटीवी निगरानी और यात्री अलार्म सिस्टम दिए गए हैं। आंशिक रूप से खुलने वाली खिड़कियों के साथ बच्चों की देखभाल के लिए अलग कमरा और प्रार्थना कक्ष भी बनाया गया है। बांग्लादेश की परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोचों की छत की संरचना को भी मजबूत किया गया है। इसका उद्देश्य अधिक यात्री दबाव के दौरान छत पर अतिरिक्त भार पड़ने की स्थिति में कोच की मजबूती बनाए रखना है। इस तरह एक ही रैक में सुरक्षा, स्थानीय परिचालन परिस्थितियों और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई बदलाव किए गए हैं।
{2024-25 में 2,102 कोच: आरसीएफ कपूरथला की ताकत का अंदाजा इसके उत्पादन आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में फैक्टरी ने 2,102 कोच बनाए, जबकि 2023-24 में यह संख्या 1,901 थी। यानी एक साल में उत्पादन 201 कोच बढ़ा। इसी अवधि में भारतीय रेलवे की तीन प्रमुख कोच निर्माण इकाइयों ने मिलकर 7,134 कोच तैयार किए। आरसीएफ का उत्पादन इसमें महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
आरसीएफ ने पिछले वर्षों में पारंपरिक यात्री कोचों से आगे बढ़कर आधुनिक जरूरतों वाले कोच तैयार करने की क्षमता विकसित की है। जर्मनी की एलएचबी तकनीक के हस्तांतरण के बाद यहां आधुनिक स्टेनलेस स्टील कोचों का उत्पादन शुरू हुआ। ये कोच अधिक गति क्षमता वाले हैं और राजधानी व शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में इस्तेमाल होते रहे हैं।
{तेजस से वंदे भारत तक
आरसीएफ की उपलब्धियों में भारत की पहली तेजस ट्रेन के कोच तैयार करना भी शामिल है। फैक्टरी से तेजस का पहला रैक मई 2017 में बाहर आया था। इसके बाद बौद्ध सर्किट रैक, उदय रैक और विभिन्न नई पीढ़ी के कोचों का उत्पादन किया गया। आरसीएफ ने हाई कैपेसिटी पार्सल वैन, 160 किलोमीटर प्रति घंटे की क्षमता वाले डबल डेकर कोच और भारतीय रेलवे के पहले वातानुकूलित इकोनॉमी श्रेणी के कोच भी तैयार किए। अब आरसीएफ ने वंदे भारत की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। मार्च 2026 में फैक्टरी ने पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस का 16 कोच वाला रैक तैयार किया। यह आरसीएफ में वंदे भारत कोच निर्माण की शुरुआत है और इससे भारतीय रेलवे की आधुनिक ट्रेनसेट उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
{निर्यात की नई राह: बांग्लादेश के लिए तैयार किया गया पहला रैक आरसीएफ के लिए केवल एक विदेशी ऑर्डर पूरा करने की उपलब्धि नहीं है। यह इस बात का संकेत भी है कि कपूरथला की फैक्टरी अब अलग-अलग देशों की तकनीकी और परिचालन जरूरतों के अनुरूप कोच डिजाइन करने की क्षमता रखती है। 200 कोच के मौजूदा ऑर्डर के पूरा होने के साथ भारत के रेल कोच निर्यात को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
2024-25 में आरसीएफ ने 2,102 कोच बनाकर पिछले वर्ष के 1,901 कोच के आंकड़े को पीछे छोड़ा। तेजस, एलएचबी, वातानुकूलित इकोनॉमी, डबल डेकर और अब वंदे भारत जैसे कोचों के निर्माण का अनुभव इसकी तकनीकी क्षमता को लगातार विस्तार दे रहा है। बांग्लादेश परियोजना इसी सफर की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है।

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