मांगें नहीं मानीं तो सभी ब्लॉकों में प्रस्ताव पारित कर धरने की बनाई जाएगी रणनीति
राहुल चावला, धर्मशाला-:जिला कांगड़ा में पंचायत समिति सदस्यों ने अपने अधिकारों और बजट में कटौती के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत समिति सदस्य संघ जिला कांगड़ा के बैनर तले सदस्यों ने डीसी कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। इस दौरान सदस्यों ने बीडीसी के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाने, विकास कार्यों में प्रभावी अधिकार देने और नियमों में आवश्यक राहत प्रदान करने की मांग उठाई।संघ के जिलाध्यक्ष एवं पंचायत समिति सदस्य चमन लाल कपूर ने कहा कि बीडीसी सदस्य भी जनता द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने गए प्रतिनिधि हैं। जनता ने उन्हें क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में पंचायत समिति सदस्यों के पास विकास कार्य करवाने के लिए पर्याप्त बजट और अधिकार नहीं हैं। ऐसे में वे अपने क्षेत्रों की जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
कपूर ने कहा कि 16वें वित्त आयोग में पंचायत समिति की बजट हिस्सेदारी को लेकर सदस्यों में भारी रोष है। उन्होंने सरकार से पंचायत समिति सदस्यों के लिए अलग बजट का प्रावधान करने की मांग की, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को गति दी जा सके।
उन्होंने टाइड और अनटाइड फंड से जुड़ी शर्तों में भी राहत देने की मांग की। उनका कहना था कि पंचायत समिति को मिलने वाले बजट के इस्तेमाल में सदस्यों को पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जिससे क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के मुताबिक विकास कार्यों का चयन किया जा सके।पंचायत समिति सदस्यों ने मनरेगा में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई। कपूर ने कहा कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की शेल्फ तैयार करते समय पंचायत समिति सदस्यों की ओर से प्रस्तावित कार्यों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इससे बीडीसी सदस्य अपने क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं और जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर उठा सकेंगे।
कपूर ने आरोप लगाया कि पंचायत समितियों की ओर से भेजे गए कई विकास कार्यों के प्रस्ताव आगे स्वीकृत नहीं हो पाते, जिसके चलते बजट वापस चला जाता है। उन्होंने कहा कि पंचायत समिति के बजट पर निर्वाचित सदस्यों का प्रभावी अधिकार होना जरूरी है। इसके साथ ही पंचायत समिति के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त तकनीकी और अन्य स्टाफ उपलब्ध करवाने की भी मांग की गई।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो सभी ब्लॉकों में प्रस्ताव पारित कर आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने प्रदेश के अन्य जिलों के पंचायत समिति सदस्यों से भी एकजुट होने का आह्वान किया।कपूर ने कहा कि विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सरकार और सभी राजनीतिक दलों को पंचायत समिति तथा जिला परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पंचायत समिति सदस्य डीसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।