Summer express/बिलासपुर, सुभाष- :बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका उचित उपचार सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन 1 सितंबर 2026 से प्रोजेक्ट दृष्टि की शुरुआत करने जा रहा है। अभियान के पहले चरण में जिलेभर में आठ वर्ष तक की आयु के बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग पर विशेष फोकस रहेगा। जिला प्रशासन का उद्देश्य शुरुआती उम्र में दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान कर बच्चों को समय पर आवश्यक उपचार और सुधारात्मक सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि कम उम्र के बच्चे अक्सर अपनी आंखों से जुड़ी परेशानी को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते। कई बार उन्हें पढ़ने, देखने या लिखने में दिक्कत होती है, लेकिन समस्या का पता समय पर नहीं चल पाता। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से आंखों की बीमारी या दृष्टि दोष की शुरुआती अवस्था में पहचान करना बेहद महत्वपूर्ण है।प्रोजेक्ट दृष्टि के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ-साथ सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आठ वर्ष तक के बच्चों का सर्वे किया जाएगा। हाल ही में डियारा स्कूल स्थित आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय में करीब 50 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान लगभग 20 प्रतिशत बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याएं पाई गईं। इनमें एस्टिग्मेटिज्म, लेजी आई और अन्य दृष्टि दोष शामिल रहे।स्क्रीनिंग के दौरान बच्चों से सिरदर्द, आंखों में परेशानी, पढ़ने में कठिनाई, पढ़ाई में मन न लगना और दूर या पास की चीजें स्पष्ट दिखाई न देने जैसे लक्षणों से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ऑटो रिफ्रेक्टोमीटर से आंखों की जांच भी की जाएगी। इससे स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
उपायुक्त ने बताया कि अभियान को चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए RBSK की टीम, रेड क्रॉस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। गठित टीमें स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करेंगी और जरूरत पड़ने पर आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए उन्हें चिन्हित किया जाएगा।प्रोजेक्ट के तहत बच्चों की जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के लिए विशेष प्रश्नावली भी तैयार की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों की आंखों की स्थिति का आधारभूत रिकॉर्ड तैयार करना है। करीब एक वर्ष बाद प्री-सर्वे और पोस्ट-सर्वे के आंकड़ों की तुलना कर अभियान के प्रभाव और परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा।व्यापक स्तर पर अभियान शुरू करने से पहले चयनित स्कूलों में इसका डेमो भी कराया जा रहा है। इसके माध्यम से सर्वे टीमों को हैंडहेल्ड उपकरणों के संचालन और पूरी स्क्रीनिंग प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार प्रोजेक्ट दृष्टि का लक्ष्य केवल आंखों की समस्या का पता लगाना नहीं, बल्कि समय पर उपचार और आवश्यक सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करना है, ताकि बच्चों की पढ़ाई, सीखने की क्षमता और भविष्य की कार्यक्षमता पर दृष्टि संबंधी समस्याओं का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।