summer express,सोनीपत। हरियाणा में बढ़ती महंगाई के बीच अब चीनी के दामों में भी भारी उछाल ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब डेढ़ महीने में चीनी के भाव 42-45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 62-65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। यानी कीमत में करीब 18 से 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। थोक कारोबारियों का कहना है कि उनके दशकों लंबे कारोबारी अनुभव में चीनी के दामों में इतनी तेज वृद्धि पहले कभी नहीं देखी गई।
कारोबारियों के अनुसार चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम की मार, गन्ने की घटती पैदावार और मांग-आपूर्ति में बढ़ता अंतर प्रमुख कारण हैं। बेमौसम बारिश और सूखे से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। वहीं कई किसान गन्ने की खेती छोड़कर धान जैसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। गन्ने की खेती में अधिक मेहनत और समय लगने के साथ भुगतान के लिए लंबा इंतजार भी किसानों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
सोनीपत, गोहाना, पानीपत, असंध और करनाल समेत प्रदेश की कई चीनी मिलों में गन्ने की पेराई और चीनी उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। सोनीपत सहकारी चीनी मिल में वर्ष 2022-23 में 30.75 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी, जो 2025-26 में घटकर 20.39 लाख क्विंटल रह गई। इस तरह चार साल में पेराई करीब 33.7 प्रतिशत घट गई।
पेराई में कमी का असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ा है। वर्ष 2022-23 में मिल में 3.08 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि 2025-26 में यह घटकर 1.90 लाख क्विंटल रह गया। यानी उत्पादन में करीब 38.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालिया सीजन में पेराई 21.60 प्रतिशत और उत्पादन 24.12 प्रतिशत कम रहा। वहीं मिल के बंद रहने का समय 151 घंटे से बढ़कर 368 घंटे हो गया।
बाजार में चीनी की उपलब्धता पर एथेनॉल उत्पादन का असर भी बताया जा रहा है। देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और उसके उप-उत्पाद का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कच्चे माल पर दबाव बढ़ने की बात कारोबारी कह रहे हैं।
सोनीपत शहर में रोजाना करीब चार हजार क्विंटल चीनी की खपत बताई जा रही है। इसके अलावा राई औद्योगिक क्षेत्र में भी चीनी की बड़ी मांग है। दवा, बिस्कुट और कोल्ड ड्रिंक उद्योगों में खपत अधिक होने के कारण स्थानीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई है। मांग पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश से डबल रिफाइंड चीनी मंगाई जा रही है, जो स्थानीय चीनी की तुलना में करीब डेढ़ से दो रुपये प्रति किलो महंगी पड़ रही है।
थोक कारोबारियों ने आशंका जताई है कि यदि मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना रहा तो अगले एक महीने में चीनी के भाव 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, कीमतों में आगे कितना बदलाव होगा, यह बाजार की स्थिति और आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
चीनी महंगी होने का असर आम उपभोक्ताओं के साथ छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। चाय विक्रेताओं के अनुसार चीनी के साथ अदरक और इलायची की कीमतें बढ़ने से चाय की लागत बढ़ गई है। इसके चलते कई दुकानदारों ने 10 रुपये वाली चाय के दाम बढ़ाकर 15 रुपये कर दिए हैं। वहीं हलवाई कारोबारियों का कहना है कि चीनी के अलावा मैदा, वनस्पति और देसी घी महंगा होने से मिठाइयों की लागत बढ़ गई है। ऐसे में मिठाइयों के दाम में 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की तैयारी है।
किराना दुकानदारों के मुताबिक बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहक पहले की तुलना में कम मात्रा में चीनी खरीद रहे हैं। इससे बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।
चीनी की कीमतों में तेजी को लेकर हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि इसका सरकार से सीधा संबंध नहीं है। उनके अनुसार चीनी के दाम बाजार की स्थिति, गन्ने की पैदावार और मांग-आपूर्ति के आधार पर तय होते हैं।