summer express , अंकुर कपूर, अंबाला। शहर में आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं की बढ़ती समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आए दिन आवारा कुत्तों के हमले में बच्चे और महिलाएं घायल हो रहे हैं। वहीं अब स्कूल से घर लौट रही एक छात्रा पर बेसहारा सांड ने हमला कर दिया। सांड ने छात्रा को दो बार उठाकर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत छात्रा को सांड के चंगुल से बचाया और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि छात्रा सड़क से गुजर रही थी, तभी सांड ने अचानक उस पर हमला कर दिया। हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोगों के समय रहते पहुंचने से छात्रा को सुरक्षित बचाया जा सका।
आवारा कुत्तों के हमलों से भी शहर के कई इलाकों में लोग परेशान हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि कुत्तों के झुंड बच्चों और महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। एक महिला ने बताया कि उसके बेटे पर आवारा कुत्तों ने हमला कर उसकी टांग बुरी तरह नोच दी थी। बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उसे कई इंजेक्शन लगाए गए। महिला ने नगर परिषद में शिकायत देकर आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग भी की थी।
एक अन्य महिला ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उसके बेटे को भी आवारा कुत्तों ने काट लिया था। पीड़ितों का आरोप है कि शिकायतें देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इसके चलते लोगों में हर समय इस बात का डर बना रहता है कि कब कोई आवारा कुत्ता या बेसहारा पशु हमला कर दे।
नगर परिषद अंबाला कैंट के ईओ देवेंद्र नरवाल ने बताया कि आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं की समस्या अलग-अलग है। बेसहारा पशुओं को पकड़कर गौशाला में भेजा जाता है, लेकिन वहां क्षमता सीमित होने के कारण अधिक पशुओं को रखने में परेशानी आती है। उन्होंने बताया कि इस समस्या के संबंध में जिला उपायुक्त और नगर निगम आयुक्त को भी अवगत कराया गया है।
उन्होंने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए पिछले एक साल से टेंडर के माध्यम से काम कराया जा रहा था, लेकिन यह टेंडर करीब डेढ़ महीने पहले समाप्त हो चुका है। नगर परिषद की ओर से जल्द ही दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
शहरवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं की समस्या का जल्द स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है, ताकि सड़क पर आने-जाने वाले लोगों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।