एजेंसी| काठमांडू
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी। सुबह 9 बजे तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया जिसमें कई इलाके चपेट में आ गए।
नेपाल के आधकारि सूत्रों के अनुसार 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 130 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि जिस ग्लेशियल झील के फटने से अचानक बाढ़ आई थी, वहां अभी भी करीब 7 मीटर ऊंचा पानी का बांध बना हुआ है। यह कभी भी टूट सकता है।
कुछ रिपोर्टों में 46 शव मिलने की जानकारी सामने आई। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के मुताबिक 384 पर्यटकों और यात्रियों का संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय शामिल हैं। इसके अलावा 37 अनिवासी भारतीय भी लापता बताए गए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक सूची है और संबंधित यात्रा एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा अधिकारियों के माध्यम से नामों और स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है। इसलिए इसे अंतिम लापता सूची नहीं माना जा सकता।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में हुआ। पानी और मलबे के तेज बहाव में बाजार, मकान, वाहन, पुल और सड़कें बह गईं। रसुवागढ़ी सीमा शुल्क क्षेत्र को भी भारी नुकसान हुआ है। नेपाल पुलिस के अनुसार रसुवा में तीन पुलिस कार्यालयों को नुकसान पहुंचा है। सुरक्षा बलों के कई जवान भी संपर्क से बाहर हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार रसुवा में सशस्त्र पुलिस बल के एक निरीक्षक समेत नौ जवान लापता हैं, जबकि बाद की जानकारी में सुरक्षा बलों से जुड़े लापता लोगों की संख्या और अधिक बताई गई है।
लापता भारतीयों में कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार एक यात्रा एजेंसी से जुड़े 59 भारतीय यात्रियों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।
छह बड़ी बिजली परियोजनाएं प्रभावित
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ से कम से कम छह प्रमुख जलविद्युत और बिजली पारेषण सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना, चिलिमे जलविद्युत परियोजना, त्रिशूली-3ए, त्रिशूली-3बी हब 220 केवी उपकेंद्र, त्रिशूली जलविद्युत केंद्र और देवीघाट जलविद्युत केंद्र शामिल हैं। कई वितरण ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। प्राधिकरण ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वालों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
चीन में भी नुकसान
बाढ़ का असर नेपाल-चीन सीमा के दूसरी ओर तिब्बत के जिरोंग क्षेत्र तक पहुंचा है। भूस्खलन और मलबे के कारण सीमा क्षेत्र में सड़क, संचार और बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबर है।