एजेंसी। नई दिल्ली
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को कथित तौर पर ध्वस्त किए जाने और उसकी जगह व्यावसायिक परिसर बनाए जाने का मामला सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह दावा किया और भारत सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
बलूचिस्तान सिख काउंसिल से मिली जानकारी में धार्मिक विरासत के लगातार कमजोर होने पर चिंता जताई गई है। हालांकि, इस ताजा दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। उपलब्ध आधिकारिक पाकिस्तानी रिकॉर्ड में क्वेटा का गुरुद्वारा सिंह सभा अब भी कार्यशील गुरुद्वारों की सूची में दर्ज है। आरपी सिंह के मुताबिक, बलूचिस्तान में कभी करीब 12 गुरुद्वारे होने की जानकारी सामने आती रही है, जिनमें अब केवल दो के बचे होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सिख समुदाय की आस्था, इतिहास और विरासत से जुड़ा पवित्र स्थल है। ऐसे स्थान पर व्यावसायिक निर्माण किए जाने की खबर गंभीर चिंता का विषय है। आरपी सिंह ने विदेश मंत्रालय से पाकिस्तान सरकार के समक्ष मामला उठाने, कथित विध्वंस की स्वतंत्र जांच कराने और गुरुद्वारे की जमीन पर किसी भी व्यावसायिक निर्माण को रोकने की मांग की है। उन्होंने ऐतिहासिक परिसर के पुनर्निर्माण और संरक्षण के साथ पाकिस्तान में बचे अन्य गुरुद्वारों और सिख धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की।
{क्वेटा का गुरुद्वारा रिकॉर्ड में
पाकिस्तान के एवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड की मौजूदा सूची में क्वेटा स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा को कार्यशील गुरुद्वारों में शामिल किया गया है। इसलिए बलूचिस्तान में किस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराए जाने का दावा किया जा रहा है। इससे पहले फारूकाबाद में करीब 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के बड़े हिस्से को गिराए जाने का मामला सामने आया था। भारत ने इस पर चिंता जताई थी।
धामी ने जताया विरोध
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराए जाने की निंदा की है। उन्होंने इसे सिख विरासत और भावनाओं पर हमला करार दिया। धामी ने कहा कि सिख गुरुओं और इतिहास से जुड़े धार्मिक स्थल केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि सिख इतिहास, पहचान और विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। धामी ने कहा कि पाकिस्तान में सिख गुरुओं और सिख इतिहास से जुड़े कई गुरुद्वारे हैं। इनका संरक्षण धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धार्मिक संपत्तियों को गिराकर वहां व्यावसायिक निर्माण करना सिख भावनाओं का अपमान है।