Summer express , संगरूर। पंजाब के संगरूर जिले के गांव तूरबंजारा में नशे के मुद्दे को लेकर एक वरिष्ठ मंत्री के कार्यक्रम में सवाल उठाने वाले व्यक्ति की मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि कार्यक्रम में नशे की समस्या उठाने के बाद गांव के कुछ लोगों ने उस पर माफी मांगने के लिए दबाव बनाया और उसे कथित तौर पर धमकाया। परिजनों के अनुसार, मानसिक रूप से परेशान होकर उसने सल्फास निगल लिया, जिसके बाद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक की पहचान गांव तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह के रूप में हुई है। उसके भाई बिक्कर सिंह और जसवीर सिंह ने बताया कि रविवार को गांव में पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान गुलजार सिंह ने मंत्री के समक्ष गांव में फैल रहे चिट्टे के नशे का मुद्दा उठाया था।
परिजनों के अनुसार, गुलजार सिंह ने कहा था कि उसका बेटा नशे की गिरफ्त में है और नशे की लत के कारण घर का सामान तक बेच चुका है। इससे पूरा परिवार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गुलजार सिंह ने यह भी आरोप लगाया था कि गांव में चिट्टे का नशा खुलेआम बिक रहा है। परिवार का दावा है कि इस मुद्दे पर सवाल उठाने के बाद उसे कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाल दिया गया।
मृतक के भाई बिक्कर सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह गुलजार सिंह ने उनसे बातचीत के दौरान कहा था कि गांव की सरपंच के पति बलजीत सिंह उर्फ राजू, सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा, पंच विक्की और एक अन्य व्यक्ति उस पर पंचायत में पहुंचकर नशे के मुद्दे पर माफी मांगने का दबाव बना रहे हैं। परिवार का आरोप है कि गुलजार सिंह को कथित तौर पर धमकाया भी जा रहा था।
परिजनों के मुताबिक, गुलजार सिंह ने माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा था कि नशे ने उसके परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है और वह इस मुद्दे पर सवाल उठाने के लिए माफी नहीं मांगेगा। इसके बाद उसने कथित तौर पर सल्फास निगल लिया।
तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर उसे पहले पटियाला और बाद में लुधियाना स्थित डीएमसी अस्पताल रेफर किया गया, जहां देर रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने पर डीएसपी रूपिंदर कौर बाजवा मौके पर पहुंचीं और मृतक के परिवार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के बयान के आधार पर मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिवार ने मामले में नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी पंजाब में राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान विरोध या सवाल उठाने वालों के साथ कथित दबाव और पुलिस कार्रवाई के आरोप सामने आ चुके हैं। गांव शेरों में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाने वाले मोहनजीत सिंह शेरों ने भी पुलिस पर कथित तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।