समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को अब स्कूल स्तर पर और व्यापक किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने राज्य के करीब 3,600 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के 7.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने की योजना बनाई है।
इसका उद्देश्य केवल नशे के नुकसान के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को नशे के शुरुआती जोखिमों, साथियों के दबाव और प्रलोभन से बचने के व्यावहारिक तरीके सिखाना है। इस पहल में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 14 सप्ताह के कार्यक्रम में सामान्य भाषणों के बजाय वास्तविक घटनाओं पर आधारित वीडियो, कार्यपत्रक, प्रश्नोत्तरी, समूह चर्चा और गतिविधि आधारित शिक्षण को शामिल किया गया है।
विद्यार्थियों को नशे की लत के वैज्ञानिक पहलुओं के साथ जरूरत पड़ने पर नशे को स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ कहने, वहां से हट जाने और साथियों के दबाव का सामना करने के तरीके बताए जाएंगे। कार्यक्रम के शुरुआती आकलन में विद्यार्थियों की सोच में सकारात्मक बदलाव सामने आया है।
चिट्टे को एक बार आजमाने से भी गंभीर लत लगने का खतरा समझने वाले विद्यार्थियों का अनुपात करीब 60 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गया।
अभिभावकों की भागीदारी
स्कूल अभियान को परिवार और समुदाय से जोड़ने पर भी जोर है। अभिभावक-शिक्षक बैठकों में माता-पिता को बच्चों में नशे के शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप के बारे में जागरूक किया जा रहा है। लाल आंखें, अत्यधिक थकान और इंजेक्शन के निशान जैसे संभावित संकेतों पर ध्यान देने की जानकारी दी जाएगी।
{शिक्षकों की अहम भूमिका: 21 हजार से अधिक शिक्षकों को विद्यार्थियों में नशे के सेवन तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी शुरुआती समस्याओं की पहचान और समय पर हस्तक्षेप के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्कूलों में नशा-मुक्त क्लब बनाने और विद्यार्थियों को गुमनाम तरीके से सूचना देने के लिए शिकायत पेटियां लगाने की भी व्यवस्था की जा रही है।
{500 मीटर का क्षेत्र नशा-मुक्त: राज्य की तीन वर्षीय ‘नशा मुक्त विद्यालय’ कार्ययोजना 2026-29 के तहत स्कूलों के आसपास 500 मीटर के दायरे को नशा-मुक्त क्षेत्र बनाने पर जोर है। यहां चेतावनी बोर्ड लगाने, तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर नियमों का पालन कराने और विद्यार्थियों व अभिभावकों को परामर्श देने की व्यवस्था की जाएगी। लक्ष्य है कि 2028-29 तक स्कूल निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार हो जाएं।
{इलाज पर भी जोर: रोकथाम के साथ उपचार व्यवस्था को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है। सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले 2024 के 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 हो गए। जुलाई 2026 तक 14 हजार से अधिक लोग इन केंद्रों में दाखिल हो चुके थे। सरकारी पुनर्वास केंद्रों में भी दाखिले 2024 के 2,644 से बढ़कर 2025 में 8,574 हुए।