Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़। डीएम गगनदीप रंधावा आत्महत्या मामले में पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और उनके निजी सहायक की जमानत याचिकाओं पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। दोनों पक्षों की ओर से अदालत के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखी गईं। दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले में अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया।
सुखदेव सिंह भुल्लर की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आत्महत्या से पहले मृतक डीएम गगनदीप रंधावा ने उनका नाम नहीं लिया था। उनका इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें मामले में गलत तरीके से घसीटा गया है। उनके वकील ने उनकी उम्र का हवाला देते हुए अदालत से जमानत देने का आग्रह किया। याचिका में यह भी कहा गया कि जांच में सहयोग किया जा रहा है और हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
मामले में सुखदेव सिंह भुल्लर के निजी सहायक ने भी जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया है। दोनों जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने अपने तर्क रखे। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब दोनों आरोपितों की जमानत पर हाई कोर्ट के निर्णय का इंतजार है।
सीबीआइ जांच की मांग वाली याचिका वापस
इसी मामले में सीबीआइ से जांच करवाने की मांग को लेकर ओपिंदर कौर की ओर से दायर याचिका भी सोमवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच ठीक दिशा में चल रही है और जांच एजेंसी की ओर से चालान भी पेश किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में इस स्तर पर मामले की जांच सीबीआइ को सौंपना उचित नहीं होगा। अदालत की इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने का निर्णय लिया।
हालांकि हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के लिए आगे अदालत का दरवाजा खुला रखा है। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में याचिकाकर्ता को यह लगे कि मामले की जांच सही तरीके से नहीं हो रही है तो वह दोबारा हाई कोर्ट का रुख कर सकती हैं। इस तरह सीबीआइ जांच की मांग वाली मौजूदा याचिका वापस लिए जाने के साथ फिलहाल मामला समाप्त हो गया।