एजेंसी | नई दिल्ली
केंद्र सरकार की नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 में आपदा या महामारी जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए ईपीएफ योगदान में अस्थायी राहत का प्रावधान किया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर कर्मचारी और नियोक्ता के भविष्य निधि योगदान को अधिकतम तीन महीने के लिए आंशिक या पूरी तरह घटाने या स्थगित करने का फैसला ले सकेगी। यह व्यवस्था पूरे देश या किसी विशेष राज्य अथवा क्षेत्र में लागू की जा सकती है।
यह प्रावधान अपने आप लागू नहीं होगा। सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी के मूल वेतन का 12 प्रतिशत ईपीएफ में योगदान के तौर पर जमा होता रहेगा। सरकार की ओर से विशेष अधिसूचना जारी होने के बाद ही योगदान की दर घटाने या उसे कुछ समय के लिए टालने की व्यवस्था लागू होगी। निर्धारित संस्थानों के लिए लागू 10 प्रतिशत योगदान की
व्यवस्था भी सामान्य परिस्थितियों में जारी रहेगी।
सरकार किसी आपदा के दौरान कर्मचारी का योगदान कम करती है तो उस अवधि में उसकी मासिक सैलरी में हाथ में मिलने वाली रकम बढ़ सकती है। हालांकि, ईपीएफ खाते में जमा होने वाली राशि कम होने से उस अवधि की सेवानिवृत्ति बचत पर असर पड़ सकता है।
{पेंशन पर भी असर संभव: ईपीएफ में कर्मचारी के योगदान का एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना से भी जुड़ा होता है। इसलिए योगदान में अस्थायी बदलाव की स्थिति में पेंशन से जुड़े लाभों पर प्रभाव नियमों और लागू व्यवस्था के अनुसार पड़ सकता है। हालांकि, तीन महीने की अवधि समाप्त होने के बाद सामान्य योगदान व्यवस्था बहाल की जा सकती है।
{ कोविड से मिला था आधार: कोविड-19 महामारी के दौरान मई से जुलाई 2020 तक सरकार ने ईपीएफ योगदान की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत की थी। इससे उस समय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को तत्काल नकदी राहत मिली थी। नई योजना में इसी तरह की आपात राहत के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।