Summer express/अंबाला -: अंबाला छावनी के एक्साइज एरिया में संपत्तियों के मालिकाना हक का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। वर्षों से अपने घरों और दुकानों में रह रहे परिवारों की संपत्ति संबंधी समस्याओं को लेकर टीम चित्रा की संस्थापक एवं नेत्री चित्रा सरवारा ने ‘आजाद अंबाला कैंपेन’ के तहत बाजारों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।इसी कड़ी में बजाजा बाजार और बर्तन बाजार में हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों से उनकी समस्याएं और सुझाव लिए गए। अभियान के दौरान स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने संपत्ति की रजिस्ट्री, स्वामित्व हस्तांतरण, फ्री-होल्ड प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक अड़चनों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर अभियान में भाग लेकर मांगों के समर्थन का भरोसा दिलाया।
चित्रा सरवारा ने कहा कि अंबाला छावनी में कई परिवार दशकों से अपनी संपत्तियों में रह रहे हैं और कारोबार चला रहे हैं। ऐसे परिवारों के लिए मालिकाना हक का प्रश्न केवल जमीन या मकान का मामला नहीं है, बल्कि उनकी जीवनभर की कमाई, परिवार की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब नागरिक वर्षों से हाउस टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और अन्य सरकारी शुल्कों का भुगतान करते आए हैं, तो संपत्तियों के पूर्ण और स्पष्ट स्वामित्व को लेकर अनिश्चितता क्यों बनी हुई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले में नागरिकों को स्पष्ट अधिकार और सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए।फ्री-होल्ड प्रक्रिया से जुड़े प्रस्तावित शुल्क को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि नागरिकों को अपनी संपत्ति को फ्री-होल्ड कराने के लिए अत्यधिक राशि का भुगतान करना पड़ा, तो इसका सीधा असर मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ेगा। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जो लोगों के लिए स्वामित्व हासिल करने का रास्ता आसान करे, न कि आर्थिक बोझ बढ़ाए।
चित्रा सरवारा ने कहा कि सरकार को फ्री-होल्ड नीति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करनी चाहिए और नागरिकों को यह बताया जाना चाहिए कि प्रक्रिया क्या होगी, शुल्क कितना होगा और संपत्ति मालिकों को किन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने रजिस्ट्री, भवन नक्शों की स्वीकृति, स्वामित्व हस्तांतरण और बैंक ऋण जैसी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की भी मांग की।उन्होंने कहा कि ‘दशकों से कर हमारा, तो मालिकाना हक भी हमारा’ अभियान का मूल उद्देश्य उन परिवारों की आवाज को सामने लाना है, जो लंबे समय से अपनी संपत्तियों को लेकर स्थायी और स्पष्ट अधिकार की मांग कर रहे हैं।
चित्रा सरवारा ने कहा कि ‘आजाद अंबाला कैंपेन’ को बाजारों और स्थानीय नागरिकों से मिल रहे सहयोग के आधार पर अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन के समक्ष नागरिकों की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से लगातार उठाया जाएगा तथा स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान की मांग जारी रहेगी।उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अंबाला छावनी के एक्साइज एरिया की संपत्तियों से जुड़े मामलों को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए। वर्षों से इंतजार कर रहे परिवारों को स्पष्ट नीति, आसान प्रक्रिया और कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।