Summer express/शिमला, संजू-:हिमाचल प्रदेश में सेब की एमआईएस खरीद दर बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। ठियोग से कांग्रेस विधायक और AICC प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने सरकार से एमआईएस के तहत सेब की खरीद दर 12 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है। राठौर ने कहा कि बढ़ती मजदूरी, खाद, उर्वरक, फंगीसाइड और पेस्टिसाइड की कीमतों के साथ मौसम की मार ने बागवानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान करीब 13 से 14 विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर भी एमआईएस की दर बढ़ाने की मांग की है।
2015 के बाद लगातार बढ़ी उत्पादन लागत
AICC प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में 12 रुपये प्रति किलो की एमआईएस दर बागवानों के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में सेब की एमआईएस खरीद दर करीब 6.20 रुपये प्रति किलो थी, लेकिन इसके बाद उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। मजदूरी के साथ खाद, उर्वरक, कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाओं की कीमतों में भी इजाफा हुआ है।
मौसम की मार से फसल पर असर
राठौर ने कहा कि इस साल कई क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेब की फसल प्रभावित हुई है। इससे बागवानों की आय पर दबाव और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया है और सरकार से एमआईएस की दर बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है। राठौर ने कहा कि सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अंतिम निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन बागवानों की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
13-14 विधायकों ने सौंपा मुख्यमंत्री को ज्ञापन
राठौर के मुताबिक करीब 13 से 14 विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से व्यक्तिगत मुलाकात कर एमआईएस की दर बढ़ाने को लेकर ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और बागवानी विभाग को इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। राठौर ने एमआईएस के तहत लंबित भुगतान भी जल्द जारी होने की उम्मीद जताई। इसके साथ ही उन्होंने दूध की खरीद दर और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का स्वागत किया।
किशाऊ परियोजना के वित्तीय पहलू का स्वागत
किशाऊ परियोजना को लेकर राठौर ने कहा कि हिमाचल के वित्तीय हितों को देखते हुए परियोजना के पावर कंपोनेंट से जुड़ी करीब 2 हजार करोड़ रुपये की देनदारी अन्य लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन किया जाना स्वागत योग्य है। हालांकि उन्होंने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव और विस्थापन को लेकर चिंता भी जताई।
पर्यावरण और पुनर्वास पर जताई चिंता
राठौर ने बड़े बांधों और टनलिंग के प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित होने वाले लोगों के पुनर्वास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने Revenue Deficit Grant के मुद्दे पर केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश को पर्याप्त वित्तीय सहयोग उपलब्ध करवाने की मांग की।