Summer express/शिमला-: शिमला जिला के विकास खंड छौहारा के थाना (जांगला) क्षेत्र की कविता शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमिता की नई मिसाल कायम की है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने उद्यमी सफर की शुरुआत करने वाली कविता शर्मा ने सीमित संसाधनों के बावजूद दुग्ध प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा और करीब 11 महीनों में अपनी इकाई की क्षमता को 20 लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर लगभग 800 लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाया।आज उनकी इकाई में घी, पनीर, दही और मक्खन सहित विभिन्न दुग्ध उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उद्यम ने न केवल उनके परिवार के लिए आजीविका का साधन तैयार किया है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की 100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध के लिए नियमित बाजार भी उपलब्ध करवाया है।
स्वयं सहायता समूह से मिली उद्यम की राह
कविता शर्मा वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें खाद्य प्रसंस्करण और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। सरस मेले, दिल्ली हाट, अंतर्राष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल और अन्य स्थानीय मेलों में उत्पादों के स्टॉल लगाने के दौरान उन्हें ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग, उत्पाद गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन की व्यावहारिक जानकारी मिली।
इन गतिविधियों ने उनके भीतर अपना व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास पैदा किया। मेलों में ग्राहकों से मिली प्रतिक्रिया ने उन्हें स्थानीय संसाधनों पर आधारित दुग्ध उत्पादों के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
PMFME सहायता से आधुनिक मशीनरी स्थापित
अपने अनुभव को व्यवसाय का रूप देते हुए कविता शर्मा ने अक्टूबर 2025 में एसएचजी नंदला के माध्यम से दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद प्रसंस्करण इकाई शुरू की। शुरुआत में प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध का ही प्रसंस्करण किया जाता था। सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता बढ़ाना उनके सामने बड़ी चुनौती थी।इसी दौरान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) के अंतर्गत उन्हें 7 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता से इकाई में आधुनिक मशीनरी और आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए, जिससे उत्पादन क्षमता और प्रसंस्करण व्यवस्था में सुधार हुआ।इकाई में बीएमसी, बैच पाश्चराइजर, होमोजेनाइजर, कल्चर टैंक, हॉट रूम, क्रीम सेपरेटर, कोएगुलेशन टैंक, फिलिंग मशीन, वैक्यूम पैकेजिंग मशीन, डी-फ्रीजर और मडानी जैसी मशीनरी स्थापित की गई है।
11 महीनों में 20 से 800 लीटर प्रतिदिन तक पहुंची क्षमता
आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं के बाद इकाई ने तेजी से विस्तार किया। अक्टूबर 2025 में 20 लीटर प्रतिदिन से शुरू हुआ दूध प्रसंस्करण सितंबर 2026 तक बढ़कर करीब 800 लीटर प्रतिदिन हो गया है। वर्तमान में उद्यम का अनुमानित वार्षिक कारोबार करीब 70 लाख रुपये बताया गया है।
दुकान-दुकान जाकर तैयार किया बाजार
उत्पादन बढ़ाने के साथ उत्पादों के लिए बाजार तैयार करना भी कविता शर्मा के सामने चुनौती थी। उन्होंने स्वयं स्थानीय दुकानदारों से संपर्क किया और दुकान-दुकान जाकर अपने उत्पादों की जानकारी दी। ग्राहकों और दुकानदारों से प्राप्त सुझावों के आधार पर उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रस्तुति में निरंतर सुधार किया।निरंतर प्रयासों से उनके उत्पादों ने रोहड़ू, चिड़गांव, जुब्बल और आसपास के क्षेत्रों के बाजारों में अपनी पहचान बनानी शुरू की है। कविता शर्मा के अनुसार वर्तमान उत्पादन क्षमता के बावजूद बाजार की पूरी मांग को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है।
100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों को नियमित बाजार
कविता शर्मा की इकाई का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। आसपास के क्षेत्रों की 100 से अधिक महिलाएं नियमित रूप से इकाई को दूध उपलब्ध करवा रही हैं। दूध की खरीद के एवज में इन महिला दुग्ध उत्पादकों को लगभग 7 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है।इससे स्थानीय महिलाओं को अपने क्षेत्र में ही दूध बेचने का नियमित और भरोसेमंद बाजार मिला है। साथ ही, क्षेत्र में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
दो स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार
इकाई के विस्तार के साथ दो स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। कविता शर्मा अपने पति के साथ मिलकर उद्यम के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इस प्रकार इकाई स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का माध्यम बन रही है।
सरकारी योजनाओं से मिला उद्यम को विस्तार का अवसर
कविता शर्मा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला, जिससे उन्हें बाजार और विपणन की समझ विकसित करने में मदद मिली।उन्होंने कहा कि शुरू से ही अपना उद्यम स्थापित करना उनका सपना था। प्रदेश सरकार, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के सहयोग से उन्हें इस सपने को साकार करने का अवसर मिला।उन्होंने बताया कि 20 लीटर प्रतिदिन दूध के प्रसंस्करण से शुरू हुई उनकी इकाई करीब 11 महीनों में 800 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई है। गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भविष्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण का उदाहरण
कविता शर्मा की पहल यह दर्शाती है कि स्वयं सहायता समूह, सरकारी योजनाओं, स्थानीय संसाधनों और उद्यमशीलता के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उनका उद्यम आज परिवार की आय का साधन बनने के साथ-साथ 100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों के लिए नियमित बाजार और दो स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम भी बना है।