शिमला,संजू-: हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री के नए कार्यालय के निर्माण को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने नए मुख्यमंत्री कार्यालय पर होने वाले खर्च को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि दूसरी ओर शिक्षा और विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है।सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नए कार्यालय को लेकर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेशवासियों को नया मुख्यमंत्री कार्यालय मिलने जा रहा है। उनके मुताबिक, सचिवालय में तैयार किए जा रहे इस कार्यालय पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आर्थिक संकट से गुजर रहे हिमाचल जैसे राज्य में इतनी बड़ी राशि कार्यालय के निर्माण पर खर्च करना सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े करता है।
भाजपा विधायक ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में किसी मुख्यमंत्री के कार्यालय के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने का उदाहरण सामने नहीं आया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब राज्य आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है तो ऐसे समय में इस तरह के खर्च को किस आधार पर उचित ठहराया जा रहा है।सुधीर शर्मा ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े संस्थानों के लिए धन की कमी क्यों बताई जा रही है।उन्होंने नए कार्यालय में लगाए जा रहे फर्नीचर पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि कुछ सोफों की कीमत 6 से 7 लाख रुपये प्रति सोफा तक बताई जा रही है और इनके बिल भी बनाए गए हैं।सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीरता से विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी स्थिति पैदा नहीं करनी चाहिए, जहां आने वाले समय में प्रदेश के पास संसाधनों की कमी हो जाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हालात ऐसे नहीं होने चाहिए कि “प्रदेश, प्रदेश न रहे, कहीं केंद्र शासित प्रदेश न बन जाए।”