summer express , पेशावर। पाकिस्तान ने गुरुवार सुबह दावा किया कि उसकी वायुसेना ने अफगानिस्तान में 10 ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल एक दिन पहले पाकिस्तान के खिलाफ ड्रोन हमलों के लिए किया गया था। इस कार्रवाई के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा पर तनाव और बढ़ गया है।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हमलों की जानकारी दी। यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अफगान तालिबान बलों ने आठ ड्रोन उड़ाए और पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर गोलीबारी की। इससे पहले पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सीमा पार से उग्रवादियों की घुसपैठ की कथित कोशिश को नाकाम करने का दावा किया था।
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों को लेकर काबुल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। वहीं, तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को अफगान तालिबान बलों की ओर से पाकिस्तान पर किसी हमले से इनकार किया था। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी वायुसेना ने पूर्वी अफगानिस्तान में उन ठिकानों पर हमला किया, जिन्हें उग्रवादियों के अड्डे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने कोहाट और तोरखम की ओर बढ़ रहे आठ ड्रोन मार गिराए। अधिकारियों का कहना है कि सभी ड्रोन नष्ट कर दिए गए और इन घटनाओं में किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के महीनों में सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ को लेकर तनाव बना हुआ है। इस्लामाबाद लगातार अफगान तालिबान सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि वह पाकिस्तानी तालिबान से जुड़े लड़ाकों को अफगान जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति देती है। काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, घुसपैठ की कोशिश नाकाम किए जाने के बाद अफगान तालिबान बलों ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर मोर्टार और भारी हथियारों से गोलीबारी की। इसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तोपखाने से गोलाबारी करते हुए अफगान तालिबान की कुछ सीमा चौकियों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
अधिकारियों ने दावा किया कि इसके बाद कुछ अफगान तालिबान बलों ने अपने ठिकाने छोड़ दिए और उन्हें नुकसान भी हुआ। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी।
दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से चीन, तुर्की, कतर और सऊदी अरब की मध्यस्थता कोशिशों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इन देशों की कोशिश काबुल और इस्लामाबाद के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा संबंधी तनाव को कम कर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की है।