summer express , चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने करीब चार दशक पुराने पदोन्नति विवाद में कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए पंजाब सरकार को वर्ष 1986 से बकाया वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी को पदोन्नति देने से विभाग की गलती के कारण रोका गया हो और बाद में अदालत उस कर्मचारी के पदोन्नति अधिकार को स्वीकार कर ले, तो केवल इस आधार पर आर्थिक लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने उस अवधि में उच्च पद पर काम नहीं किया था। ऐसे मामले में ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का सिद्धांत लागू नहीं होगा।
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने जसपाल सिंह की याचिका पर फैसला सुनाया। याचिका में 10 सितंबर 2002 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत उन्हें 18 सितंबर 1986 से पदोन्नति का वास्तविक आर्थिक लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके कनिष्ठों को 18 सितंबर 1986 को पदोन्नति दे दी गई, जबकि उन्हें नजरअंदाज किया गया। इसके बाद उन्होंने सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जालंधर के सिविल जज वरिष्ठ मंडल ने 13 जून 1997 को उनके पक्ष में फैसला देते हुए माना था कि उन्हें 18 सितंबर 1986 से पदोन्नति के लिए विचार किया जाना चाहिए था। पंजाब सरकार की अपील भी खारिज हो गई और इसके बाद कोई आगे की अपील नहीं की गई। इस तरह सिविल कोर्ट का फैसला अंतिम हो गया। इसके बावजूद वर्ष 2002 में उन्हें केवल काल्पनिक पदोन्नति दी गई और बकाया वेतन से वंचित रखा गया।
हाई कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कर्मचारी को अपने अधिकार के लिए सिविल मुकदमा लड़ना पड़ा और 1997 में डिक्री उसके पक्ष में होने के बाद भी विभाग ने पदोन्नति को लागू करने में देरी की। कोर्ट ने माना कि पदोन्नति रोकने में कर्मचारी की कोई गलती नहीं थी, बल्कि देरी और चूक विभाग की ओर से हुई। इसलिए ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का सिद्धांत यहां लागू नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्वव्यापी पदोन्नति के मामलों में आर्थिक लाभ का निर्णय परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसे ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का कठोर और हर मामले में लागू होने वाला नियम नहीं माना जा सकता।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए जसपाल सिंह को 10 सितंबर 1986 से बकाया वेतन का हकदार माना। पंजाब सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह बकाया राशि दो महीने के भीतर अदा करने का निर्देश दिया गया है ।