summer express , नई दिल्ली। डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों से कथित मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर हमले की घटनाओं पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त संदेश जाना जरूरी है। 7 सितंबर को अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से म्हात्रे की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया। वहीं, म्हात्रे की ओर से दाखिल जमानत शर्तों को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी गई।
यह मामला 6 जुलाई को डोंबिवली के केडीएमसी संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों से कथित मारपीट से जुड़ा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एक महिला ने सीजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्चे को जन्म दिया था। जांच में बच्चे की गर्दन में नाल दो बार लिपटी होने की बात सामने आई, जिसके चलते उसे तत्काल विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत थी। अस्पताल का नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) पहले से भरा होने के कारण डॉक्टरों ने परिजनों को बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी।
इसके बाद परिजनों ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे से संपर्क किया। उस समय डॉक्टर अन्य मरीजों के इलाज में व्यस्त थे और फोन नहीं उठा सके। आरोप है कि इससे नाराज होकर म्हात्रे अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों के साथ बहस के बाद उनके साथ मारपीट की। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसके बाद मामला चर्चा में आया और डॉक्टरों की ओर से विरोध किया गया। पुलिस ने 9 जुलाई को म्हात्रे को गिरफ्तार किया था।
मामले में पहले निचली अदालत ने म्हात्रे को जमानत दी थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उस जमानत पर रोक लगा दी थी। बाद में 7 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने म्हात्रे और अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत दी। अदालत ने आरोपियों को महाराष्ट्र से बाहर रहने, गवाहों या पीड़ित डॉक्टरों से संपर्क नहीं करने और जांच में सहयोग करने जैसी शर्तें लगाईं। साथ ही मामले की सुनवाई को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाई कोर्ट का मामले में स्वत: संज्ञान लेना और पहले दी गई जमानत पर रोक लगाना उचित था। 7 सितंबर की सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार ने म्हात्रे की जमानत रद्द करने की मांग की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए 28 सितंबर को सूचीबद्ध किया।