summer express,सिंगापुर। सिंगापुर की एक अदालत ने सरकारी सिस्टम से जुड़ी फाइलों की सुरक्षा को खतरे में डालने के मामले में भारतीय नागरिक जनार्दनन तमिल कोवन को 28 सप्ताह जेल की सजा सुनाई है। 42 वर्षीय जनार्दनन ने स्टेट कोर्ट्स में आईटी वेंडर के तौर पर काम करते हुए सरकारी लैपटॉप में अनधिकृत बदलाव करने और अदालत व सरकार से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा से समझौता करने का अपराध स्वीकार किया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जनार्दनन को जून 2024 में लेनोवो पीसीसीडब्ल्यू सॉल्यूशंस के सर्विस डिलीवरी मैनेजर के तौर पर सिंगापुर स्टेट कोर्ट्स में तैनात किया गया था। वह अदालत की क्लाउड सिस्टम टीम के टीम लीडर थे, जो विभिन्न आईटी सिस्टम और एप्लिकेशन का प्रबंधन करती है।
कंपनी की ओर से उन्हें लेनोवो थिंकपैड लैपटॉप दिया गया था। यह सरकारी प्रबंधन वाला डिवाइस था और GovTech की स्वीकार्य उपयोग नीति तथा लेनोवो की सुरक्षा नीति के अधीन था। इन नीतियों के तहत लैपटॉप में अनधिकृत तरीके से बदलाव करने या बाहरी व्यक्ति को पहुंच देने पर रोक थी।
अपना लैपटॉप खराब होने के बाद उसने सरकारी लैपटॉप से दी परीक्षा
4 अगस्त 2025 को जनार्दनन ने एक अंतरराष्ट्रीय पेशेवर संगठन की परीक्षा देने का फैसला किया। यह परीक्षा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी गवर्नेंस से संबंधित थी और उसका उद्देश्य ‘सर्टिफाइड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी मैनेजर’ प्रमाणन हासिल करना था। अपना निजी लैपटॉप खराब होने के कारण उसने सरकारी सुरक्षा-प्रोटेक्टेड लैपटॉप का इस्तेमाल करने की कोशिश की।
जब वह लैपटॉप पर जरूरी तरीके से काम नहीं कर सका तो उसने हरि बालन नाम के व्यक्ति से संपर्क किया। दोनों की पहले WhatsApp पर आईटी से जुड़े कोर्स को लेकर बातचीत हुई थी। कोर्ट दस्तावेजों के मुताबिक, बालन का आईपी एड्रेस भारत में था।
लैपटॉप में मौजूद थीं 18,016 फाइलें
रिमोट कनेक्शन स्थापित किए जाने के समय जनार्दनन के लैपटॉप में स्टेट कोर्ट्स की 18,016 फाइलें मौजूद थीं। इनमें एक फाइल को छोड़कर बाकी ‘रिस्ट्रिक्टेड’ और ‘नॉन-सेंसिटिव’ श्रेणी की थीं। हालांकि, एक फाइल ‘रिस्ट्रिक्टेड’ और ‘हाई सेंसिटिव’ श्रेणी में थी।
इन फाइलों में स्टेट कोर्ट्स के नेटवर्क से जुड़े लॉगिन क्रेडेंशियल, सीक्रेट कीज और नेटवर्क आर्किटेक्चर से संबंधित जानकारी शामिल थी। पुलिस के अनुसार, हालांकि इन फाइलों में किसी विशेष मामले की संवेदनशील जानकारी नहीं थी, लेकिन इनमें मौजूद विवरण का इस्तेमाल उन सिस्टम्स तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने के लिए किया जा सकता था, जहां केस की जानकारी और जजों के नोट्स जैसी गोपनीय सामग्री मौजूद थी।
रिमोट एक्सेस की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
14 अगस्त 2025 को सिंगापुर न्यायपालिका के कॉर्पोरेट सर्विसेज डिवीजन के एक अधिकारी ने सरकारी लैपटॉप में रिमोट डेस्कटॉप एप्लिकेशन के अनधिकृत इंस्टॉलेशन की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट की टेक्नोलॉजी क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की।
जनार्दनन ने सितंबर 2025 में स्वीकार किया कि उसके कदम से सरकारी फाइलों की सुरक्षा खतरे में पड़ी थी। हालांकि रिमोट कनेक्शन के दौरान कोई फाइल ट्रांसफर नहीं हुई, लेकिन जांच में सामने आया कि इस कनेक्शन के जरिए फाइलों को ट्रांसफर या चोरी किए जाने की संभावना थी। एक अन्य आरोप पर भी अदालत ने विचार किया।
अभियोजन ने 7 से 9 महीने की सजा की मांग की
डिप्टी पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मैथ्यू चू ने अदालत से जनार्दनन को 7 से 9 महीने की जेल की सजा देने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी को संवेदनशील सरकारी जानकारी वाले लैपटॉप की जिम्मेदारी दी गई थी और उसे अनधिकृत पहुंच की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी।
वहीं, बचाव पक्ष के वकील एस. बालमुरुगन और ए. रविदास ने तीन से चार महीने की सजा की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि जनार्दनन की पत्नी और दो बच्चे भारत में हैं और उसका परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है।
जिला न्यायाधीश लॉरेन हो ने कहा कि मामले में संभावित नुकसान का खतरा गंभीर था, क्योंकि अनधिकृत पहुंच के जरिए सिस्टम पर हमला होने की आशंका थी, जिससे जनता में डर और चिंता पैदा हो सकती थी। अदालत ने यह भी माना कि जनार्दनन ने एक अज्ञात विदेशी व्यक्ति को अपने सरकारी लैपटॉप के डेटा तक अनधिकृत पहुंच दी थी। इसके बाद अदालत ने उसे 28 सप्ताह की जेल की सजा सुनाई।