समर न्यूज | चंडीगढ़
हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषण को लेकर पंजाब में नया विवाद खड़ा हो गया है। रोपड़ से आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सिरसा और सतलुज नदियों के पानी में रासायनिक, दवा संबंधी और भारी धातुओं के प्रदूषण की पर्याप्त जांच नहीं की जा रही। उन्होंने बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। सिरसा नदी हिमाचल के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से होकर पंजाब में प्रवेश करती है और रोपड़ क्षेत्र में सतलुज में मिलती है। ऐसे में सरसा में पहुंचने वाला औद्योगिक प्रदूषण आगे सतलुज तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। चड्ढा का कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययनों में सरसा नदी के पानी में दवा संबंधी यौगिकों, जहरीली धातुओं और अन्य औद्योगिक प्रदूषकों की मौजूदगी सामने आ चुकी है, इसलिए नियमित निगरानी में इन प्रदूषकों की भी जांच होनी चाहिए।
अगस्त की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अगस्त 2026 की सतही जल विश्लेषण रिपोर्ट में सिरसा नदी के घनौली के पास लिए गए नमूने में अत्यधिक बैक्टीरियल प्रदूषण दर्ज किया गया। 11 अगस्त को लिए गए नमूने में कुल कोलीफॉर्म 1,30,000 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर और फीकल कोलीफॉर्म 23,000 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर पाया गया। इसी नमूने में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग यानी बीओडी 5.4 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज हुई, जो निर्धारित 3 मिलीग्राम प्रति लीटर मानक से अधिक है। ये आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पहले भी सरसा नदी में प्रदूषण की समस्या सामने आती रही है। मार्च 2026 में घनौली के पास कुल कोलीफॉर्म 60,000 एमपीएन और फीकल कोलीफॉर्म 17,000 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया था। इससे संकेत मिलता है कि नदी की जल गुणवत्ता में समस्या केवल किसी एक महीने तक सीमित नहीं है।
}बद्दी क्षेत्र से प्रदूषण का आरोप…
चड्ढा ने इससे पहले दावा किया था कि बद्दी क्षेत्र में करीब 2,200 औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनमें लगभग 1,000 इकाइयां तरल अपशिष्ट पैदा करती हैं। उनके अनुसार करीब 377 इकाइयों का अपशिष्ट साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र तक पहुंच रहा है, जबकि शेष के अपशिष्ट के नालों और जलधाराओं में जाने की आशंका है। ये आंकड़े और आरोप विधायक ने संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर रखे हैं और इनके आधार पर प्रत्येक इकाई को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इससे पहले रोपड़ में सतलुज के हेडवर्क्स के पास औद्योगिक और ठोस कचरा जमा होने के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिमाचल और हरियाणा के संबंधित प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों के साथ संयुक्त जांच की मांग भी की थी।
{एनजीटी तक पहुंचा मामला…
सिरसा नदी के प्रदूषण और उसके सतलुज पर संभावित प्रभाव का मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक भी पहुंच चुका है। चड्ढा की याचिका पर अधिकरण ने सितंबर में हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़े सवालों पर जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को निर्धारित है।
{निगरानी का दायरा बढ़ाने की मांग…
ताजा विवाद का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या नदी की नियमित जांच में पारंपरिक जल गुणवत्ता मानकों के साथ दवा संबंधी अवशेषों और भारी धातुओं जैसे उभरते प्रदूषकों को भी शामिल किया जाना चाहिए।