summer express,नूरपुर (संजीव महाजन)। मातृ-शिशु अस्पताल शुरू करवाने की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे अखिल बख्शी ने बुधवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। सिविल अस्पताल नूरपुर की चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. अनुराधा शर्मा ने उन्हें जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त करवाई। हालांकि, अखिल बख्शी ने स्पष्ट किया कि अनशन खत्म हुआ है, लेकिन मातृ-शिशु अस्पताल शुरू करवाने की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अखिल बख्शी के समर्थन में मंगलवार को महिलाओं और युवाओं ने सड़क पर उतरकर रोष रैली निकाली थी। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और सरकार से अस्पताल को जल्द शुरू करवाने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि 24 घंटे के भीतर मांग को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद अखिल बख्शी ने प्रेस वार्ता कर आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अस्पताल शुरू होने तक संघर्ष जारी रहेगा और क्षेत्र की जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाता रहेगा। उन्होंने कहा कि मातृ-शिशु अस्पताल की सुविधा शुरू होने से नूरपुर क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी तथा इलाज के लिए उन्हें दूसरे क्षेत्रों में जाने की जरूरत कम होगी।
प्रेस वार्ता के दौरान बख्शी ने नूरपुर के विधायक रणवीर सिंह निक्का और पूर्व विधायक अजय महाजन पर भी निशाना साधा। उन्होंने दोनों नेताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को आने वाले समय में जनता के सामने रखा जाएगा।
अखिल बख्शी ने दावा किया कि 1 जनवरी 2027 को पूर्व विधायक अजय महाजन से जुड़े कई मुद्दों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने इसे नूरपुर की जनता के लिए ‘तोहफा’ बताते हुए कहा कि आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने रखी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि मातृ-शिशु अस्पताल को शुरू करवाने की मांग किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे नूरपुर क्षेत्र की जनता से जुड़ा स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा है। उनके अनुसार, अस्पताल शुरू होने से क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बख्शी ने सात दिन के आंदोलन के दौरान समर्थन देने वाली महिलाओं, युवाओं और क्षेत्रवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल शुरू करवाने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो जनता से विचार-विमर्श कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।