लक्की मेहता | लुधियाना
समर न्यूज
लुधियाना नगर निगम की एफएंडसीसी और जनरल हाउस की बैठक वार्ड नंबर 47 की पार्षद ऊषा कल्याण के निधन के चलते स्थगित कर दी गई। बैठक के दौरान मेयर इंदरजीत कौर ने ऊषा कल्याण के निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद जनरल हाउस की बैठक स्थगित करने का फैसला लिया गया। अब यह बैठक सोमवार, 12 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे गुरु नानक देव भवन में होगी।
बैठक से पहले ही करीब ₹82.5 करोड़ के मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर को लेकर विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता ममता आशु और आम आदमी पार्टी की पार्षद महक टीना के पति गुरकरण टीना ने टेंडर की दरों और शर्तों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, रूचि विशाल गुलाटी ने 1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की वार्डवार तैनाती का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। ऐसे में सोमवार की बैठक में सफाई व्यवस्था और टेंडर को लेकर हंगामे के आसार हैं। पंजाब के पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु की पत्नी ममता आशु ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर नगर निगम के मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि लुधियाना में सड़कों की सफाई के लिए प्रस्तावित ₹2,500 प्रति किलोमीटर की दर दूसरे शहरों के मुकाबले काफी अधिक है। ममता आशु ने कहा कि यदि ₹2,500 प्रति किलोमीटर की दर सड़क के एक किनारे की सफाई के लिए है, तो दोनों किनारों की सफाई का खर्च ₹5,000 प्रति किलोमीटर तक पहुंच सकता है।
आम आदमी पार्टी की वार्ड नंबर 53 की पार्षद एडवोकेट महक टीना के पति गुरकरण टीना ने भी करीब ₹82.5 करोड़ के मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिल्ली की कंपनी को सड़कों की सफाई का काम देने से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जरूरत बताई। गुरकरण टीना ने पंजाबी कहावत ‘अक्खी देख के मखी नी निगली जांदी’ के जरिए अपना विरोध जताया। इस कहावत का भाव है कि किसी भी मामले को बिना जांचे-परखे स्वीकार नहीं करना चाहिए।
नगर निगम में रखे गए 1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की तैनाती को लेकर रूचि विशाल गुलाटी ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि निगम प्रशासन सार्वजनिक करे कि शहर के किन-किन वार्डों में कितने सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं और प्रत्येक वार्ड में कितने कर्मचारी सफाई का काम कर रहे हैं। मैकेनिकल स्वीपिंग के करोड़ों रुपये के टेंडर पर उठ रहे सवालों के बीच सफाईकर्मियों की तैनाती का मुद्दा भी अहम हो गया है। सोमवार की बैठक में इस मांग पर चर्चा होती है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।
पानी की खपत और सड़कों की सुरक्षा पर भी सवाल: मैकेनिकल स्वीपिंग में पानी के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ममता आशु ने पंजाब में भूजल संकट और कई क्षेत्रों के ब्लैक जोन में होने का हवाला देते हुए पूछा कि सड़कों की सफाई में पानी की इतनी खपत कितनी उचित है। इसके अलावा, पानी के दबाव से सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। इस संबंध में विश्वविद्यालय की आपत्ति का भी उल्लेख किया जा रहा है।
टेंडर और सफाई व्यवस्था पर रहेगी नजर: नगर निगम की बैठक पहले 10 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन पार्षद ऊषा कल्याण के निधन के बाद मेयर इंदरजीत कौर द्वारा 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के बाद जनरल हाउस स्थगित कर दिया गया। अब 12 अक्टूबर को होने वाली बैठक में करीब ₹82.5 करोड़ के मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर और 1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की वार्डवार तैनाती का मुद्दा अहम रह सकता है। टेंडर की दरों, शर्तों, पानी की खपत और कंपनी के चयन पर उठ रहे सवालों के बीच निगम प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। वहीं, सफाईकर्मियों की तैनाती का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग पर भी पार्षदों और निगम अधिकारियों के रुख पर नजर रहेगी।