Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। हरियाणा में धान की सरकारी खरीद के बीच बारिश ने किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ा दी है। अंबाला छावनी की अनाज मंडी में खुले में रखी धान की फसल बारिश के कारण भीग गई। किसानों का कहना है कि मंडी में पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था नहीं होने और नालियों की सफाई न होने से पानी जमा हो गया, जिससे उनकी फसल को नुकसान पहुंचा। हालांकि, कुछ किसानों का मानना है कि नुकसान सीमित रहा है। वहीं, मंडी प्रशासन का दावा है कि आढ़तियों ने बारिश से पहले धान को ढकने की व्यवस्था कर ली थी, इसलिए फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।
धान की फसल इस समय मंडियों में पहुंच रही है। इस बार फसल समय से पहले पककर तैयार होने के कारण किसानों ने सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही मंडियों में धान लाना शुरू कर दिया था। खरीद में देरी को लेकर किसानों को पहले भी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई जगह उन्हें विरोध-प्रदर्शन तक करना पड़ा। अंबाला छावनी की अनाज मंडी में बड़ी मात्रा में धान पहुंचने के बीच अचानक हुई तेज बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दीं। मंडी में खुले स्थानों पर रखी कई ढेरियों में पानी पहुंच गया और धान भीग गई।
किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी की नालियां भरी होने के कारण बारिश का पानी ठीक से नहीं निकल पाया। पानी जमा होने से खुले में रखी धान प्रभावित हुई। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था की गई होती, तो नुकसान को कम किया जा सकता था। उनका यह भी कहना है कि फसल को बारिश से बचाने के लिए उपलब्ध तिरपाल पर्याप्त नहीं थे।
बारिश के बाद सोमवार को मौसम खुलने पर किसान भीगी हुई धान को सुखाने में जुट गए। किसानों की चिंता है कि फसल को दोबारा सुखाने में समय लगेगा और इसके चलते सरकारी खरीद की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि समय पर खरीद होने से उन्हें अपनी उपज मंडी में लंबे समय तक रखने की परेशानी से बचाया जा सकता है।
दूसरी ओर, अंबाला छावनी अनाज मंडी के सचिव नीरज भारद्वाज ने बताया कि मंडी में अब तक 3,691 गेट पास जारी किए जा चुके हैं। मंडी में धान की कुल आवक 2,54,000 क्विंटल तक पहुंच गई है, जबकि 1,82,000 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। इसके अलावा 85,612 क्विंटल धान का उठान किया जा चुका है।
मंडी सचिव के अनुसार, बारिश जरूर हुई थी, लेकिन आढ़तियों ने पहले से ही मंडी में रखी धान को तिरपाल से ढकने की व्यवस्था की हुई थी। इसी कारण मंडी प्रशासन को धान के बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी धान को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लेकर आएं। उनके मुताबिक, सरकारी खरीद के लिए धान में नमी की निर्धारित सीमा 17 प्रतिशत तक है। निर्धारित मानकों के अनुरूप सूखी फसल लाने से खरीद प्रक्रिया समय पर पूरी करने में मदद मिलेगी।
बारिश के बाद मंडी में धान को सुखाने और उसकी सुरक्षा की चुनौती बनी हुई है। जहां किसान जल निकासी और फसल को सुरक्षित रखने के इंतजामों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं मंडी प्रशासन का कहना है कि बारिश से नुकसान को रोकने के लिए आढ़तियों ने आवश्यक तैयारी की थी। अब किसानों की नजरें धान की खरीद और उठान में तेजी आने पर टिकी हैं, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े।