Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:कांगड़ा से जोगिंदरनगर तक चलने वाली ऐतिहासिक रेल सेवा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। करीब चार साल तक एक पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद रहे इस रेल मार्ग पर सेवा बहाल होने के बाद अब ट्रेनों की सीमित आवाजाही को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानियां सामने आई हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुनील बरसेन ने रेलवे विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि रेल सेवा शुरू होने के बावजूद लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सुनील बरसेन ने कहा कि अंग्रेजों ने करीब सौ वर्ष पहले मात्र तीन साल में 164 किलोमीटर लंबे पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल मार्ग का निर्माण कर दिया था। उस समय आधुनिक तकनीक और संसाधनों की कमी थी, लेकिन आज तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद एक पुल के क्षतिग्रस्त होने से यह रेल सेवा करीब चार साल तक प्रभावित रही। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों और रेलवे संघर्ष समिति के लगातार प्रयासों के बाद 11 तारीख को रेल मार्ग पर दोबारा सेवा शुरू की गई।बरसेन ने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग की ओर से निर्धारित नए समय-सारिणी में स्थानीय लोगों की जरूरतों और हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया है। उन्होंने बताया कि सुबह पांच बजे पठानकोट से बैजनाथ के लिए पहली ट्रेन रवाना होगी, जबकि दूसरी ट्रेन सुबह सात बजे चलेगी। इसके बाद दिनभर इस मार्ग पर कोई ट्रेन नहीं चलेगी। वापसी में ये ट्रेनें रात करीब 9:50 बजे और 10:50 बजे पठानकोट पहुंचेंगी।उन्होंने कहा कि इतनी लंबी अवधि तक रेल सेवा उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और रेलवे ट्रैक का भी समुचित उपयोग नहीं हो पाएगा। बरसेन ने कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के सांसद से आग्रह किया कि वे इस मामले को गंभीरता से उठाएं और रेलवे विभाग के समक्ष स्थानीय जनता की मांगों को रखें।उन्होंने मांग की कि रेल सेवा का संचालन यात्रियों की जरूरतों के अनुसार किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को आवागमन के साथ-साथ आजीविका के साधन के रूप में भी इस ऐतिहासिक रेल मार्ग का वास्तविक लाभ मिल सके।