नए जिलों के गठन पर जल्दबाजी न करे भाजपा, आयोग की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेगी सरकार: नरेश चौहान
Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। प्रदेश सरकार की ओर से आयोग के गठन के बाद भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए जिलों के गठन को लेकर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया है, बल्कि सभी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए आयोग गठित किया गया है। आयोग छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसके बाद रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन की मांग लंबे समय से उठती रही है। कई क्षेत्रों के लोग बेहतर प्रशासनिक सुविधाओं और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच के लिए अलग जिलों की मांग करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस विषय पर आयोग बनाने का निर्णय लिया है। आयोग विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट में व्यावहारिक सुझाव देगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाना नहीं, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और आम जनता को सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। नए जिलों के गठन से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही सरकार उचित निर्णय लेगी।भाजपा नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर की जा रही बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए चौहान ने कहा कि जब अभी केवल आयोग का गठन हुआ है और उसकी रिपोर्ट आना बाकी है, तो विपक्ष को पहले ही विरोध करने की इतनी जल्दी क्यों है? उन्होंने कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि किन क्षेत्रों में नए जिले बनाने की आवश्यकता है और इसके लिए क्या संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में रिपोर्ट आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
नरेश चौहान ने भाजपा से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नए जिलों के गठन के पक्ष में नहीं है, तो उसे अपनी स्थिति खुलकर जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस विषय को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है।चौहान के मुताबिक, नए जिलों के गठन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय प्रशासनिक जरूरतों, जनहित और व्यावहारिक संभावनाओं पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर ही प्रदेश हित में फैसला लिया जाएगा।