एजेंसी | नागपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान दावा किया कि भारत में भी बांग्लादेश, फ्रांस और नेपाल जैसे हालात पैदा करने की कोशिशें हो रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी शक्तियां भारत को दबाव में रखना चाहती हैं और सत्ता परिवर्तन के जरिए अपने समर्थकों को आगे लाना चाहती हैं। उनके मुताबिक, कुछ नेता भी देश और हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने वाली ताकतों का साथ दे रहे हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने शस्त्र पूजन किया और अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव तथा देश की सांस्कृतिक पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है। अलग-अलग धर्मों, भाषाओं, जातियों और परंपराओं का सम्मान करते हुए सभी को साथ लेकर चलना जरूरी है। भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में समस्याओं को लेकर आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। आंदोलनों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ या समाज में नफरत और विभाजन बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं के समाधान में समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उनके अनुसार, बाहरी दबावों के बीच भारत को एकजुट और सतर्क रहना चाहिए।
विकास में प्रकृति का ध्यान जरूरी
संघ प्रमुख ने विकास के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का ध्यान रखने की जरूरत बताई। उन्होंने नेपाल में आई आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में एकतरफा विकास गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार इस्तेमाल और ओटीटी मंचों पर उचित नियमों की जरूरत भी बताई।