{पर्यावरण नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी, शर्तों का उल्लंघन होने पर रद्द हो सकती है परियोजना की पर्यावरण मंजूरी
गुरशरण सिंह/सागर पाहवा
समर न्यूज | मोहाली
ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने न्यू चंडीगढ़ में विकसित किए जा रहे इकोसिटी-3 प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
गमाडा ने पत्र में परियोजना की पर्यावरण मंजूरी के अंतर्गत निर्धारित शर्तों का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों को इनका पालन करवाने के लिए कहा है। इकोसिटी-3 परियोजना न्यू चंडीगढ़ के रसूलपुर, सलामतपुर, धोड़े माजरा, टकीपुर, राजगढ़, माजरा, करतारपुर, कांसला और होशियारपुर गांवों से संबंधित है। इस परियोजना को पंजाब की स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए) की ओर से 29 सितंबर, 2026 को पर्यावरण मंजूरी जारी की गई थी।
गमाडा के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना के तहत हरित क्षेत्र विकसित करने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। पर्यावरण मंजूरी की शर्तों के मुताबिक परियोजना में 36,226 पेड़ लगाने, मौजूदा पेड़ों का सर्वेक्षण और रिकॉर्ड तैयार करने और आवश्यकतानुसार पेड़ों का प्रत्यारोपण करने का प्रावधान है। इसके अलावा पौधों की जियो-टैगिंग और नियमित देखभाल भी जरूरी बताई गई है।
पत्र में सड़कों, पार्किंग स्थलों, परियोजना की सीमाओं और सार्वजनिक सुविधाओं के आसपास कई स्तरों वाली हरित पट्टियां विकसित करने के निर्देश भी शामिल हैं। इसके लिए स्थानीय प्रजातियों के चौड़ी पत्तियों वाले पौधों को प्राथमिकता देने और सूखने वाले पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाने की शर्त रखी गई है।
पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर रद्द हो सकती है मंजूरी
दस्तावेज के अनुसार, परियोजना से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों, विकासकर्ताओं और रखरखाव एजेंसियों को पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का पालन करना होगा। किसी अन्य एजेंसी या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को जिम्मेदारी हस्तांतरित किए जाने तक संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी बनी रहेगी। जिम्मेदारी हस्तांतरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत एसईआईएए की सहमति भी आवश्यक होगी। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का पालन नहीं होने पर संबंधित प्राधिकरण बिना अतिरिक्त नोटिस के मंजूरी रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है। गलत या फर्जी जानकारी दिए जाने की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।
निर्माण कार्यों और पर्यावरण संबंधी रिपोर्टों पर भी नजर
गमाडा की ओर से भेजे गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना में निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे और निर्धारित नियमों के अनुसार ही किए जाएं। किसी भी प्रकार के विस्तार या बदलाव से पहले एसईआईएए की आवश्यक मंजूरी प्राप्त करनी होगी। इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान धूल से प्रभावित होने वाले श्रमिकों को मास्क उपलब्ध करवाने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पालन करने और पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करने की शर्तें भी शामिल हैं। परियोजना के पर्यावरण प्रबंधन और हरित क्षेत्र विकास से संबंधित खर्च एवं प्रगति का रिकॉर्ड रखने तथा छह-छह महीने के अंतराल पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी उल्लेख किया गया है।