Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे 10,757 अतिथि अध्यापकों का आंदोलन तेज हो गया है। नौकरी नियमित कराने और अन्य मांगों को लेकर शिक्षकों की न्याय रैली सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रही। रविवार को कुरुक्षेत्र के पिपली स्थित ताज पार्क से चंडीगढ़ के लिए पैदल रवाना हुए शिक्षक पहले पड़ाव में शाहबाद पहुंचे थे। यहां उन्होंने शहीद उधम सिंह स्मारक में रात्रि विश्राम किया। इसके बाद सोमवार को शिक्षक चंडीगढ़ की ओर आगे बढ़े। शाहबाद स्थित गुरुद्वारा मंजी साहिब कार सेवा की ओर से शिक्षकों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई।
चंडीगढ़ रवाना होने से पहले रविवार को गेस्ट टीचरों ने पिपली मिनी जू के पास जीटी रोड पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान शिक्षकों ने करीब 15 मिनट तक मुख्य मार्ग जाम रखा। महिला शिक्षकों ने सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश यादव और अन्य पदाधिकारियों के अनुसार, शिक्षकों की प्रमुख मांग वर्ष 2014 में बनाई गई तीन वर्षीय नियमितीकरण नीति को लागू करना है। उनका कहना है कि नीति की शर्तें पूरी करने वाले शिक्षकों की सेवाएं नियमित की जाएं। इसके साथ ही शिक्षक अदालत के आदेशों के अनुसार 28 मई 2014 से नियमित माने जाने, बकाया राशि पर छह प्रतिशत ब्याज, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य देय लाभ देने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों ने नए नियमों में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), वेतन वृद्धि, चिकित्सा अवकाश और नियमितीकरण के स्पष्ट प्रावधान नहीं होने पर भी आपत्ति जताई है।
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2005-06 में हुई थी, जब सरकारी स्कूलों में रिक्त पद भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया के बाद करीब 12,700 शिक्षकों को अतिथि अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के बाद से ही ये शिक्षक अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग उठा रहे हैं। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां सरकार ने दलील दी थी कि ये नियुक्तियां अस्थायी व्यवस्था के तहत की गई थीं। हालांकि, अदालत ने लंबे समय तक सेवाएं लेने के बाद शिक्षकों को केवल अस्थायी कर्मचारी मानने पर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि करीब 20 वर्षों तक काम लेने के बाद शिक्षकों के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है और उन्हें मनमाने ढंग से अस्थायी विकल्प की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
शिक्षकों का कहना है कि नियमितीकरण से वर्ष 2014 की नीति की पात्रता पूरी करने वाले टीजीटी, पीजीटी, भाषा शिक्षक, ड्राइंग शिक्षक और कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर सहित अन्य संबंधित कर्मचारियों को लाभ मिल सकता है। नियमित होने पर नियमानुसार वेतनमान, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, चिकित्सा सुविधाएं, मातृत्व एवं पितृत्व अवकाश, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन संबंधी लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।
गेस्ट टीचरों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम बनाया है। इसके तहत 26 अक्टूबर को प्रदेशभर में विधायकों और मंत्रियों को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद 1 नवंबर को गुरुग्राम, कैथल, अंबाला, करनाल, हिसार और रोहतक में बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना है। शिक्षकों का कहना है कि वे नौकरी की सुरक्षा और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।