एजेंसी | मानसा
पंजाब के मानसा में युवक दलजीत सिंह की मौत के बाद शव को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुआ टकराव अब और गंभीर हो गया है। पुलिस ने अपने जवानों पर कथित हमले के मामले में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि 27 अक्टूबर को 30 से 40 हथियारबंद लोगों ने शव को अपने कब्जे में लेने से रोकने पर पुलिस टीम पर हमला किया। इस दौरान एक जवान के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया गया। दूसरी ओर, मृतक के परिजनों और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर शव जबरन अपने कब्जे में लेने का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव, मानसा के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। दलजीत के परिजनों ने मौत के पीछे नशे को कारण बताया था और शव को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस ने शव अपने कब्जे में लेकर बठिंडा स्थित एम्स में पोस्टमार्टम कराया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ। आयोग ने मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मौत के कारणों पर जवाब मांग रहे परिजनों और समर्थकों से पुलिस ने शव अपने कब्जे में ले लिया और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया।
आयोग ने मामले की गहन जांच करने को कहा है। दलजीत के परिजनों ने मौत के पीछे नशे की आशंका जताई है, जबकि पुलिस इसे संदिग्ध हत्या मानकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम एम्स बठिंडा में कराया गया है। मौत का वास्तविक कारण जांच से स्पष्ट होगा।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब भम्मे कलां गांव के निवासी दलजीत सिंह का शव मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण उसे मानसा में नशे के खिलाफ चल रहे धरने में ले जाना चाहते थे। यह धरना नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर चल रहा है। परिवार का आरोप है कि दलजीत की मौत नशे के कारण हुई और क्षेत्र में नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। उन्होंने नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस के अनुसार, रमदित्तेवाला चौक पर तैनात सशस्त्र पुलिस बल के जवान कुलदीप सिंह ने अपने बयान में बताया कि 27 अक्टूबर की शाम उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ लोग युवक का शव लेकर शहर की ओर बढ़ रहे हैं। पुलिस टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो कथित तौर पर तलवारों और गंडासों से लैस लोगों ने हमला कर दिया।
जवान ने आरोप लगाया कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की और उनके साथ मारपीट की। इसी दौरान उनके सिर पर लोहे की रॉड से वार किया गया। घायल जवान को मानसा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने बीएनएस की हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी पर हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
}मौत के कारण पर पुलिस और परिवार के अलग-अलग दावे
दलजीत की मौत को लेकर पुलिस और परिवार के बयानों में अंतर है। परिजनों ने नशे की अधिक मात्रा लेने से मौत होने की आशंका जताई है, जबकि पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए मृतक के पिता जरनैल सिंह की शिकायत पर तीन आरोपियों के खिलाफ अलग प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और शव को सड़क किनारे फेंकने में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद की गई है। दलजीत का शव पोस्टमार्टम के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बठिंडा ले जाया गया, जहां तीन डॉक्टरों के पैनल ने परीक्षण किया। मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट करने के लिए आगे की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।