Summer express, सोहना (गुरुग्राम)। हरियाणा के सोहना नगर परिषद में करीब एक दशक पहले हुए स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई की है। वर्ष 2014-15 में करीब 4.87 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए इस प्रोजेक्ट की प्राथमिक जांच के बाद तत्कालीन चीफ इंजीनियर, एसडीओ, नगर परिषद के दो तत्कालीन सचिवों और तीन ठेकेदारों सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से खरीद और कार्य आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई, जिससे सरकारी खजाने को 80 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
एसीबी की शुरुआती जांच में स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट के लिए खरीदी गई सामग्री की कीमतों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि बाजार में उपलब्ध दरों के मुकाबले करीब 20 से 25 प्रतिशत अधिक कीमत पर लाइट से संबंधित सामान खरीदा गया। इससे सरकारी धन पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। अब जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि सामग्री की कीमतें किस आधार पर तय की गईं और खरीद प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने निर्धारित नियमों का पालन किया था या नहीं।
जांच के दौरान टेंडर दस्तावेजों, कोटेशन, कार्य आवंटन आदेश, बिल और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। इसके अलावा यह भी जांचा जाएगा कि सामग्री खरीदने से पहले बाजार दरों का तुलनात्मक आकलन किया गया था या नहीं और भुगतान की मंजूरी किन अधिकारियों ने दी थी।
मामले में ठेकेदारों को उनकी निर्धारित लाइसेंस क्षमता से अधिक राशि के कार्य सौंपने का आरोप भी है। सरकारी निर्माण और विकास कार्यों में ठेकेदारों को उनकी श्रेणी और लाइसेंस क्षमता के अनुसार ही काम आवंटित करने का प्रावधान है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुछ ठेकेदारों को निर्धारित सीमा से अधिक राशि के काम दिए गए। एसीबी अब यह पता लगाएगी कि कार्य आवंटन में किन अधिकारियों की भूमिका रही और नियमों से हटकर ठेकेदारों को काम देने का आधार क्या था।
जांच के दायरे में नगर परिषद के तत्कालीन अधिकारियों के साथ संबंधित निदेशालय के अधिकारियों की भूमिका भी शामिल है। एसीबी यह भी जांच करेगी कि प्रोजेक्ट को प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी किस स्तर पर दी गई, टेंडर प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई और भुगतान से पहले दस्तावेजों की जांच किस अधिकारी ने की थी।
प्राथमिक जांच में सरकारी खजाने को 80 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय क्षति पहुंचने का आरोप सामने आया है। हालांकि, वास्तविक नुकसान की राशि विस्तृत जांच और तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। मामला दर्ज होने के बाद एसीबी प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने के साथ संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों से पूछताछ करेगी। जांच के दौरान अन्य अनियमितताएं सामने आने पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है। करीब दस वर्ष पुराने इस मामले में हुई कार्रवाई से नगर परिषद के पुराने विकास कार्यों और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं।