चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए ‘राजस्व सड़क सुगमता नीति’ को मंजूरी दे दी है, जिससे अब राज्य में निजी भूस्वामी और डेवलपर्स राजस्व सड़कों पर नलिकाएं, ओवरपास, सबवे और पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं बिछा सकेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति को हरी झंडी दी गई।
नई नीति के तहत अब निजी भूखंडों के मालिक राजस्व रिकार्ड में दर्ज सरकारी रास्तों के नीचे या ऊपर भूमि का उपयोग वार्षिक पट्टा शुल्क देकर कर सकेंगे। यह शुल्क कृषि कलेक्टर दर के 5 प्रतिशत के अनुसार प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष निर्धारित किया गया है। इसका मकसद विभाजित भूखंडों को जोड़ना और जल, सीवरेज, बिजली, गैस जैसी जरूरी सेवाओं की सुविधा देना है।
एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, यह नीति उन भूखंड मालिकों के लिए राहत लेकर आई है जिनकी संपत्तियां राजस्व रास्तों से बंट चुकी हैं। इस फैसले से राज्य में विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है, खासतौर पर गुरुग्राम जैसे शहरों में, जहां डेवलपर्स ने इस कदम का स्वागत किया है।
हालांकि यह सुविधा केवल 6 करम (लगभग 10 मीटर) चौड़ी सक्रिय राजस्व सड़कों पर ही लागू होगी। निष्क्रिय रास्तों या ऐसी सड़कों पर, जो किसी निजी भूखंड के भीतर समाप्त होती हैं, यह नीति मान्य नहीं होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन कार्यों के लिए संबंधित स्थानीय निकाय से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नीति के तहत राज्य की भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण अधिसूचना (नवंबर 2021) में शामिल न किए गए रास्तों को भी इससे बाहर रखा गया है। इस नीति को आने वाले समय में शहरी और ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।