31 August, 2025
गणेशोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालु गणपति बप्पा की पूजा, भजन और प्रसाद अर्पित कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। परंपरा के अनुसार अंतिम विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है, लेकिन कई भक्त उससे पहले भी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं। परंपरागत रूप से 1.5 दिन (गौरी विसर्जन), तीसरे दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन और अंत में दसवें या ग्यारहवें दिन प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि मूर्तियों पर रासायनिक और जहरीले रंगों का प्रयोग न किया जाए। यदि रंग-रोगन करना हो तो केवल जल में घुलनशील, गैर-विषैले और प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें। विषैले और गैर-जैवनिम्नीकरणीय रासायनिक रंगों का इस्तेमाल सख्त वर्जित होना चाहिए, क्योंकि इससे जलस्रोत और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है।गणेशोत्सव न केवल आस्था और उत्साह का पर्व है बल्कि यह पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है।