अमेरिका | भारत और अमेरिका के बीच शुल्क को लेकर जारी खींचतान पर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अंततः दोनों देश इस मसले का हल निकाल लेंगे। बेसेन्ट ने दावा किया कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्य रूस से नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन से कहीं अधिक मेल खाते हैं।
फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में बेसेन्ट ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) को ‘‘सिर्फ दिखावे का मंच’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह एक पुराना मंच है, जिसका असर अब केवल प्रदर्शनात्मक ही रह गया है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब चीन के तियानजिन शहर में एससीओ शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस और चीन के राष्ट्रपतियों से मुलाकात की।
बेसेन्ट ने रूस से भारत की तेल खरीद पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदकर और पुनः बेचकर यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक मदद दी है। हालांकि, भारत बार-बार यह साफ कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीतियां राष्ट्रीय हित और बाज़ार की ज़रूरतों पर आधारित हैं।
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल आयात जारी रखने के चलते भारत पर 50% तक टैरिफ लगा दिया है। भारत ने इन शुल्कों को “अनुचित और अकारण” बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ विवाद ने पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका रिश्तों को सबसे निचले स्तर पर ला दिया है।
बेसेन्ट ने यह भी कहा कि रूस पर और कड़े प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिए कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में अहम कदम उठाए जा सकते हैं