लखनऊ | उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पारिवारिक पैतृक संपत्ति के बंटवारे को आसान और सस्ता बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब पैतृक अचल संपत्ति को कानूनी तौर पर परिवार में बांटने पर भारी-भरकम स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं लगेगी।
2 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया। इसका सीधा फायदा उन परिवारों को मिलेगा, जो आपसी सहमति से अपनी पैतृक संपत्ति का बंटवारा करना चाहते हैं।
सिर्फ ₹10,000 में होगा बंटवारा
नई व्यवस्था के तहत, परिवार को अब बंटवारे पर अधिकतम ₹10,000 ही खर्च करने होंगे—₹5,000 स्टाम्प ड्यूटी और ₹5,000 रजिस्ट्रेशन फीस। पहले यह खर्च लाखों रुपये तक जाता था। उदाहरण के तौर पर, 1 करोड़ की संपत्ति के बंटवारे पर पहले करीब ₹3.75 लाख का खर्च आता था, जबकि अब यही प्रक्रिया मात्र ₹10,000 में पूरी हो जाएगी।
किन्हें मिलेगा लाभ?
- यह सुविधा केवल वास्तविक व्यक्तियों के स्वामित्व वाली पैतृक संपत्ति पर लागू होगी।
- कंपनियों, ट्रस्टों या संस्थागत संपत्तियों पर यह रियायत लागू नहीं होगी।
- नियम केवल तीन पीढ़ियों तक के वैधानिक उत्तराधिकारियों (पिता, पुत्र, पोता/नाती) पर ही लागू रहेगा।
- इसके लिए परिवार को Family Register और तीन पीढ़ियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
कब से लागू होगा?
स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग जल्द ही अधिसूचना जारी करेगा, जिसके बाद यह नियम लागू हो जाएगा। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन मंत्री रवींद्र जायसवाल के मुताबिक, इस कदम से न केवल लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि संपत्ति विवाद और अदालतों में चल रहे मुकदमों में भी भारी कमी आएगी।