नई दिल्ली | सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश और महंगाई से बचाव का साधन माना जाता है, लेकिन मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ घरेलू मांग नहीं बल्कि बड़े वैश्विक कारण भी जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रैली लंबे समय तक जारी रह सकती है।
टेक्निकल एनालिसिस: कीमतें ₹1.45 लाख तक पहुंच सकती हैं
टेक्निकल चार्ट्स के मुताबिक सोना मजबूती के साथ ऊपर की ओर बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत $4,750 प्रति औंस तक जा सकती है, जो मौजूदा स्तर $3,500 से करीब 35% ज्यादा है। भारत में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा और सोने का भाव वर्तमान ₹1,06,000 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर ₹1,40,000–₹1,45,000 तक जा सकता है।
सेंट्रल बैंकों की भारी खरीद से बढ़ी मांग
डॉलर पर घटते भरोसे और भू-राजनीतिक तनाव ने सोने की मांग को नई ऊंचाई दी है। 2025 की पहली तिमाही में दुनिया के सेंट्रल बैंकों ने औसत से 24% अधिक सोना खरीदा। इसमें चीन और पोलैंड सबसे बड़े खरीदार रहे।
यूक्रेन युद्ध और रूस के विदेशी भंडार फ्रीज होने के बाद कई देशों को एहसास हुआ कि डॉलर राजनीतिक हथियार बन सकता है। यही वजह है कि अब सेंट्रल बैंक हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीद रहे हैं—जो पिछले 10 सालों के औसत से दोगुना है।
रुपए की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव
अप्रैल 2025 में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $3,500 प्रति औंस पहुंचा, तो भारत में इसकी कीमत ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम से ऊपर चली गई। रुपये की कमजोरी ने इस तेजी को और मजबूत किया।
भारतीय निवेशकों का रुख तेजी की ओर
अब भारतीय निवेशक भी सोने को एक गंभीर निवेश विकल्प मान रहे हैं। गोल्ड ETF में जून 2025 में ₹2,000 करोड़ और जुलाई में ₹1,256 करोड़ का निवेश आया। पहले जहां सोना त्योहारों और शादियों तक सीमित था, अब इसे दीर्घकालिक निवेश के रूप में अपनाया जा रहा है।