जालंधर/चंडीगढ़ | पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को बाढ़ प्रभावित जिलों में व्यापक स्वास्थ्य जांच और सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद मनुष्यों और पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, जिस पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक बाढ़ प्रभावित गांवों में लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में 1.50 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज किया गया। इन शिविरों में बुखार, दस्त, त्वचा रोग और अन्य बीमारियों की पहचान हुई है।
14 सितंबर से 21 दिनों के लिए शुरू किए गए इस अभियान के तहत 2303 प्रभावित गांवों में मेडिकल कैम्प लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2.47 लाख घरों तक आशा वर्कर पहुंच चुकी हैं और उन्हें स्वास्थ्य किट वितरित की गई हैं। इन किटों में ओआरएस, मच्छर मारने की दवा, पैरासिटामोल, क्लोरीन टैबलेट और साबुन जैसी बुनियादी दवाइयां शामिल हैं।
21 दिनों तक चलने वाले फॉगिंग और मच्छर नियंत्रण अभियान के तहत गांव-गांव जाकर लार्वा नष्ट किया जा रहा है। इसके साथ ही गांवों, गलियों और तालाबों की सफाई पर जोर दिया गया है, जिसे 21 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुपालन विभाग ने अब तक 14,780 पशुओं का इलाज और 48,535 पशुओं का मुफ्त टीकाकरण किया है। बाढ़ में मरे पशुओं का सुरक्षित निपटान किया जा रहा है ताकि मिट्टी और पानी प्रदूषित न हो। पशुपालकों को पोटाशियम परमैंगनेट वितरित किया जा रहा है ताकि पशुओं के बाड़े और पानी पिलाने की जगहें संक्रमण मुक्त रहें। मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह दी कि पशुओं के खुर और थनों की नियमित सफाई की जाए।
भगवंत मान ने कहा कि प्रभावित इलाकों में 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और किसानों को मोबाइल पर परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जल आपूर्ति पाइपलाइनों की तुरंत मरम्मत, पानी की नियमित परीक्षण और क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए गए हैं, ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस संकट की घड़ी में लोगों को राहत पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभाग बेहतर तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।