गाजा | गाजा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में इजरायली सेना और हमास लड़ाकों के बीच भीषण झड़प हुई। इस संघर्ष में चार इजरायली सैनिक मारे गए, जबकि इजरायल की हवाई और जमीनी कार्रवाई में 85 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। मृतकों में हमास के लड़ाके भी शामिल हैं।
गाजा सिटी में इजरायली टैंकों और वायुसेना की संयुक्त कार्रवाई के चलते शहर की दूरसंचार व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें बंद होने से नागरिक पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट गए हैं।
बचे लोगों की परेशानी और बढ़ी
गाजा सिटी के बाहरी इलाके में टेंट में रह रहे बासेम अल-कनोऊ ने बताया,
“हम कहां जाएं? खाने की कमी के बाद अब हमारी जान पर खतरा है। हर पल बम फट रहे हैं और गोलियां चल रही हैं।”
इजरायली सेना का कहना है कि उनका लक्ष्य हमास पर इतना दबाव बनाना है कि वह बंधकों को छोड़ दे। वर्तमान में 48 बंधक हैं, जिनमें से सिर्फ 20 के जीवित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
वेस्ट बैंक और लेबनान में भी हिंसा
- वेस्ट बैंक में जॉर्डन सीमा पर एलेनबी क्रॉसिंग पर फायरिंग में दो इजरायली सैनिक और राहत सामग्री ला रहा एक ड्राइवर मारा गया।
- इजरायली सेना ने इस हमले को आतंकी घटना बताया।
- लेबनान में इजरायली विमानों ने हिजबुल्ला के ठिकानों पर हवाई हमले किए, हालांकि नुकसान का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
इजरायल में सरकार और सेना में मतभेद
गाजा युद्ध को लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सेना के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं।
- सेना ने गाजा सिटी पर स्थायी कब्जे और कतर में हवाई हमले का समर्थन नहीं किया।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आमसभा में इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव को 142 देशों का समर्थन मिला, जबकि केवल 10 देशों ने विरोध किया।
स्वतंत्र फिलिस्तीन की मान्यता को बढ़ावा
अब तक कई यूरोपीय देश, जो कभी इजरायल के करीबी माने जाते थे, फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र मान्यता देने की ओर बढ़ रहे हैं।
कुछ देशों ने तो इजरायली उत्पादों पर प्रतिबंध और अतिरिक्त टैरिफ लगाने का भी निर्णय लिया है।
यरुशलम स्थित इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के प्रमुख योनाथन प्लेज़नर ने कहा, “प्रधानमंत्री के हाथ में सभी फैसले केंद्रित होने से सरकार और सेना के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। इससे इजरायल की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिर और अलग-थलग हो रही है।”
नागरिकों पर गहराता संकट
गाजा में लाखों नागरिक अब भी शहर में फंसे हुए हैं।
- बंधकों की रिहाई और सैन्य हमलों के चलते उनका जीवन खतरे में है।
- हजारों लोग सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर चुके हैं, लेकिन कई परिवार अब भी बमबारी के बीच जीने को मजबूर हैं।