Shimla, 28 September
हिमाचल प्रदेश में जल शक्ति विभाग में अब किसी भी कर्मचारी की भर्ती ठेकेदारों के माध्यम से नहीं होगी। विभाग अपने स्तर पर सभी भर्तियां करेगा। यह निर्णय डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हुई जल शक्ति विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया।
बैठक में बताया गया कि ठेकेदारों के माध्यम से 4,136 कर्मचारियों पर 98 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे, जबकि विभाग अपने स्तर पर यह खर्च केवल 26 करोड़ रुपये में होगा। इस मुद्दे पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा।डिप्टी सीएम ने पत्रकारों से कहा कि पिछले तीन साल में आपदा के कारण विभाग को 4,150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि मदद के रूप में केवल 800 करोड़ रुपये ही मिले हैं। 424 करोड़ रुपये मेंटेनेंस के लिए वित्त विभाग से मांगे गए हैं और 1,227 करोड़ रुपये जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से मिलने बाकी हैं।
समीक्षा बैठक में 505 करुणामूलक प्रस्ताव मंजूर किए गए और 76 लोगों को भर्ती किया गया। जलरक्षक पॉलिसी के तहत 1,346 कर्मचारियों को पैरापंप ऑपरेटर बनाया गया। सरकार जलरक्षकों को पंप ऑपरेटर या अन्य पदों पर लाने की अवधि 12 साल से घटाकर 8 साल करने पर विचार कर रही है। लगभग 4,000 मल्टीपर्पज वर्कर के लिए भी स्थाई नीति कैबिनेट में जाएगी। पंप ऑपरेटर, पैराफिटर और मल्टीपर्पज वर्कर की सैलरी बढ़ाने की पॉलिसी भी कैबिनेट में प्रस्तुत की जाएगी।
एचआरटीसी पेंशनरों के मामले में डिप्टी सीएम ने कहा कि पेंशन हर महीने जारी रहेगी। मुख्यमंत्री के विदेश से लौटते ही पेंशन फाइल साइन की जाएगी। 150 करोड़ रुपये के एचआरटीसी कर्मचारियों के लोन की देनदारी पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।