चंडीगढ़ | अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा जारी की गई 27 जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) प्रमुखों की नई सूची ने पंजाब कांग्रेस के भीतर असंतोष की लहर पैदा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, कई वरिष्ठ नेता चयन प्रक्रिया से नाखुश हैं और तरनतारन उपचुनाव के नतीजों के बाद अपनी रणनीति तय करने की तैयारी में हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कई वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शामिल हैं, की सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया है। आरोप है कि नई सूची में शामिल अधिकतर नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के करीबी नेताओं के हैं। कुछ असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि कई अयोग्य व्यक्तियों को डीसीसी में पद दिए गए हैं, जिससे पार्टी में गुटबाजी और बढ़ गई है।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पीपीसीसी प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह एआईसीसी पर्यवेक्षकों की सिफारिशों पर आधारित थी और इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं रही। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और हर निर्णय संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखकर लिया गया है।
हालांकि, नई सूची को लेकर जातिगत असंतुलन की शिकायतें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि 27 में से 11 जाट, 5 दलित और केवल 2 ओबीसी नेता को जगह दी गई है, जबकि कई अन्य समुदायों को नजरअंदाज कर दिया गया। असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि इस फैसले में योग्यता और सामाजिक संतुलन दोनों की अनदेखी की गई है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह विवाद पंजाब कांग्रेस के अंदर पुरानी गुटबाजी को फिर से उभार सकता है, खासकर तब जब उपचुनाव के बाद नेतृत्व पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।