कैथल | कैथल में +जिला परिषद की बैठक के दौरान उपाध्यक्ष के प्रतिनिधि कर्मबीर फौजी कमर पर पिस्तौल टांगकर पहुंचे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना ने बैठक में मौजूद पार्षदों और प्रतिनिधियों में चौंकने का कारण बना।
बैठक के दौरान कर्मबीर फौजी ने पिस्तौल के साथ ही विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। कई पार्षदों ने इसे नियमों के खिलाफ बताया और प्रशासन से संज्ञान लेने की मांग की। उनका कहना था कि बैठक में अक्सर बहस तेज हो जाती है और हथियार की मौजूदगी किसी भी अप्रिय घटना की संभावना बढ़ा सकती है।
बैठक में सीटों को लेकर भी असंतोष दिखा। कुछ पार्षदों को पहली पंक्ति में कुर्सी नहीं मिली, जबकि उपाध्यक्ष के प्रतिनिधि आगे बैठे रहे। इस मामले पर कर्मबीर फौजी ने कहा कि वे बैठक के लिए देर से पहुंचे थे और पिस्तौल की बेल्ट उतारना भूल गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिस्तौल वे कार में ही छोड़ आए थे और बैठक में इसे लाने का कोई इरादा नहीं था। गौरतलब है कि कर्मबीर फौजी हरियाणवी गायक भी हैं।
बैठक में 21 में से 20 जिला परिषद पार्षद और छह ब्लॉक समिति अध्यक्ष मौजूद थे। 15वें वित्त आयोग के तहत मिले लगभग एक करोड़ रुपये के बजट के उपयोग और वितरण पर भी चर्चा हुई।
जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष और वार्ड-2 से पार्षद दीप मलिक ने कहा कि बैठक में हथियार लाना नियमों के खिलाफ है और यह प्रशासनिक लापरवाही भी है। उन्होंने कहा, “बैठक में बहस अक्सर गर्म हो जाती है, ऐसे में किसी अनहोनी की जिम्मेदारी कौन लेगा?” और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
जिला परिषद अध्यक्ष कर्मबीर कौल ने कहा कि बैठक में विकास कार्यों पर मंथन किया गया और लंबित कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई। पिस्तौल लेकर बैठक में आने के मामले पर उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक जांच का विषय है।
बैठक में पिछले बजट के आठ करोड़ रुपये से होने वाले विकास कार्यों की समीक्षा भी की गई। जुलाई में कई कार्य पास हुए थे, लेकिन वर्क ऑर्डर अभी जारी नहीं हुए। कुछ कार्य पार्षदों ने अपने स्तर पर करवाए हैं, जिनकी गुणवत्ता जांच के बाद ही भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
नियमों के अनुसार, लाइसेंसधारी पिस्तौल रखने के स्पष्ट नियम हैं। यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो जांच कराई जाएगी और पिस्तौल का लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। पुलिस इस मामले में शिकायत मिलने पर जांच करेगी।