नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के मामलों में बच्चों के भलाई पर जोर देते हुए कहा है कि माता-पिता के अलग होने के बावजूद भाई-बहनों को एक साथ रहने का अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने चिंता जताई कि तलाक के बाद अक्सर बच्चे माता या पिता में से किसी एक के साथ अलग रह जाते हैं, जिससे उनका मानसिक और भावनात्मक विकास प्रभावित होता है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि भाई-बहनों का अलग रहना दर्दनाक है और बच्चों को किसी भी परिस्थिति में साथ रहकर बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। कोर्ट ने अदालतों से निर्देश दिया कि बच्चों के हितों को सर्वोपरि रखा जाए।
इस मामले में दंपती की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि मीडिएशन चल रहा है। कोर्ट ने कहा कि मीडिएशन का परिणाम आने तक सुनवाई टाल दी जा सकती है, लेकिन अगर समझौता नहीं होता है, तो सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भाई-बहन एक ही माता-पिता के साथ रहें।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ रहना उनके अधिकार और भलाई का मामला है और माता-पिता के झगड़े के कारण उन्हें अलग नहीं होना चाहिए।