Dharamshala, Rahul-:मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राजनीतिक बढ़त हासिल करने की होड़ में लगे हुए हैं और उनका आचरण यह दर्शाता है कि मानो हर कोई यह जताना चाहता हो कि “मैं भी बोलूं”। मुख्यमंत्री के अनुसार यह स्थिति विपक्ष की आंतरिक गुटबाज़ी और समन्वय की कमी को उजागर करती है। तपोवन में शुक्रवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर खुद को ही सही साबित करने की मानसिकता के साथ चलता है, जबकि सदन में स्थापित परंपराओं और प्रक्रियाओं का सम्मान करना सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल सुचारू रूप से चल रहा था, तभी नेता प्रतिपक्ष बिना निर्धारित प्रक्रिया के अचानक अपनी बात रखने पर अड़ गए। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि प्रश्नकाल के बाद उन्हें पूरा अवसर दिया जाएगा, फिर भी विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ने की कोशिश होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह व्यवहार न केवल प्रक्रियाओं का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति असम्मान भी दर्शाता है।उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं पहल करते हुए अब तक का सबसे लंबा सत्र बुलाया है, ताकि हर विधायक—चाहे सत्ता पक्ष से हों या विपक्ष से—तर्कों, तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर अपनी बात रख सके। शुरुआती नोकझोंक के बावजूद विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया है और आगे भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है, जबकि विपक्ष मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करता दिख रहा है।
कोरम पूरा न होने पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शुक्रवार होने के कारण कुछ विधायक विभिन्न कार्यक्रमों और मीडिया इंटरैक्शन में व्यस्त थे। थोड़ी देर में सभी विधायक सदन में पहुंच गए और उसके बाद कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के चलती रही।
पेंशनर्स की मांगों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अपेक्षाएँ पूरी तरह वाजिब हैं और सरकार उनके प्रति संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि 10 दिसंबर के बाद पेंशनर्स के प्रतिनिधियों को बुलाकर विस्तार से बातचीत की जाएगी, ताकि उनकी समस्याओं का ठोस और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जा सके।