नई दिल्ली। टेक जगत की दिग्गज कंपनी Meta अपने महत्वाकांक्षी मेटावर्स प्रोजेक्ट में बड़े बदलाव करने जा रही है। कंपनी के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने प्रोजेक्ट के बजट में भारी कटौती का निर्णय लिया है। यह वही प्रोजेक्ट है जिसे कभी Meta का भविष्य कहा गया था और जिसके चलते फेसबुक का नाम बदलकर Meta रखा गया था।
30% तक घट सकता है मेटावर्स डिवीजन का बजट
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी 2026 की वार्षिक योजना के तहत मेटावर्स से जुड़े डिवीजन का बजट लगभग 30% तक कम करने पर विचार कर रही है। इस डिवीजन में Meta Horizon Worlds और Quest VR यूनिट शामिल हैं, जिन पर अब तक भारी निवेश किया गया है।
आमतौर पर जुकरबर्ग सभी विभागों में करीब 10% खर्च घटाने को कहते हैं, लेकिन इस बार मेटावर्स डिवीजन में बड़ी कटौती इसलिए की जा रही है क्योंकि कंपनी को इस तकनीक से उम्मीदों के मुताबिक बाजार और रिटर्न मिलता नहीं दिख रहा।
VR और हार्डवेयर यूनिट पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट में दावा है कि वर्चुअल रियलिटी (VR) ग्रुप पर सबसे अधिक बजट कटौती का प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि मेटावर्स पर हुए अधिकतर खर्च इसी यूनिट के जरिए किए गए थे।
साथ ही, जनवरी से छंटनी की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
मेटावर्स से जुड़ा पूरा काम Meta के Reality Labs डिवीजन के तहत होता है। यह वही टीम है जो VR हेडसेट्स, AR ग्लासेज और अन्य हाइटेक हार्डवेयर तैयार करती है। 2021 से अब तक यह डिवीजन 70 बिलियन डॉलर से अधिक का घाटा झेल चुका है।
AI प्रोजेक्ट्स की ओर शिफ्ट हो रहा Meta
Meta अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनी नई प्राथमिकता बना रहा है।
जुकरबर्ग पिछले कुछ महीनों से सार्वजनिक मंचों पर AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा जोर दे रहे हैं — जैसे:
- Llama AI मॉडल
- Meta AI चैटबॉट
- Ray-Ban स्मार्ट AI ग्लासेज
टेक विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी जल्द ही Horizon Worlds जैसे मेटावर्स प्रोजेक्ट को पूरी तरह बंद भी कर सकती है, ताकि वह AI पर फोकस बढ़ा सके।
Forrester के VP माइक प्राउल्क्स पहले ही अनुमान लगा चुके हैं कि Meta जल्द ही अपने घाटे वाले मेटावर्स प्रोजेक्ट्स को कमज़ोर या बंद कर बड़े AI निवेश की तरफ बढ़ेगी।