वॉशिंगटन I अमेरिका ने विदेश से आने वाले पेशेवरों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को फिर से सख्त कर दिया है। नई नीति के तहत अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने सभी दूतावासों को स्पष्ट निर्देश भेजे हैं कि कुछ विशेष डिजिटल सेक्टर में काम कर चुके उम्मीदवारों की आवेदन प्रक्रिया अब पहले से भी अधिक गहन जांच के साथ की जाए। यह जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश विभाग के एक आंतरिक मेमो के आधार पर दी गई है।
किस पर होगी कड़ी जांच?
2 दिसंबर को जारी निर्देशों में कहा गया है कि दूतावास अधिकारी सभी आवेदकों की प्रोफाइल का गहराई से विश्लेषण करें—खासकर उनके रिज़्यूमे और LinkedIn प्रोफाइल। विशेष ध्यान उन उम्मीदवारों पर रहेगा जिन्होंने:
- फैक्ट-चेकिंग
- कंटेंट मॉडरेशन
- कंप्लायंस
- ऑनलाइन सेफ्टी
जैसी जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा, आवेदक के परिवार के सदस्यों के पेशे और अनुभव की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई संबंधित व्यक्ति वीज़ा प्रक्रिया में शामिल न हो।
कौन-कौन सी वीज़ा श्रेणियां प्रभावित होंगी?
नई नीति सभी वीज़ा श्रेणियों पर लागू है—चाहे वह पत्रकार, पर्यटक, या विशेषज्ञ पेशेवरों से जुड़ी हों। लेकिन इसका सबसे बड़ा असर H-1B वीज़ा पर पड़ेगा। यह श्रेणी तकनीक, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च-कुशल क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी विशेषज्ञों के लिए प्रमुख मार्ग है। H-1B में भारतीयों की हिस्सेदारी लंबे समय से अधिक रही है।
भारतीय पेशेवरों पर संभावित असर
USCIS के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जारी किए गए कुल H-1B वीज़ा में लगभग 70% भारतीय नागरिकों को मिले थे। भारतीय मूल के पेशेवर अमेरिकी टेक उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उनकी मजबूत उपस्थिति है—अमेरिका में कार्यरत डॉक्टरों में लगभग 6% भारतीय हैं। Google, Microsoft, IBM जैसी वैश्विक कंपनियों में भारतीय नेतृत्व स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
IT, सॉफ्टवेयर और डेटा आधारित नौकरियों में भारतीय पेशेवरों की भारी मांग को देखते हुए, नई सख्त नीति भारतीय आवेदकों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को पहले से अधिक जटिल बना सकती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, जिनकी प्रोफाइल ऑनलाइन कंटेंट मॉनिटरिंग या डिजिटल सेफ्टी जैसी भूमिकाओं से जुड़ी रही है।