चंडीगढ़। रेलू राम हत्याकांड के दोषियों संजीव और सोनिया को अंतरिम जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मृतक रेलू राम के भतीजे जितेंद्र पूनिया ने बताया कि वे स्टेट लेवल कमेटी के निर्णय को लागू कराने और दोषियों की समयपूर्व रिहाई रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। परिवार का कहना है कि इतने गंभीर अपराध में नरमी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
जितेंद्र पूनिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस हत्याकांड में 45 दिन के बच्चे से लेकर 60 वर्षीय बुजुर्ग तक आठ लोगों की सोते हुए निर्ममता से हत्या की गई थी। उनका कहना है कि ऐसे घोर अपराध के दोषियों पर किसी तरह की रियायत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 24 साल जेल में रहने के बाद भी दोषियों के व्यवहार में सुधार नहीं आया है। सोनिया पर जेल के भीतर 17 अपराध दर्ज हुए, जिनमें चार नई एफआईआर शामिल हैं। वहीं संजीव पर पांच मामले दर्ज हुए और वह पेरोल पर आने के बाद ढाई साल तक फरार रहा। पुलिस ने उसे साधु के वेश में छिपे हुए गिरफ्तार किया था।
पीड़ित परिवार के अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि जितेंद्र पूनिया और सतपाल जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक याचिका दायर करेंगे। दोनों ने सुरक्षा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र एवं ईमेल भेजे हैं। उनका कहना है कि दोषियों की रिहाई के बाद परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
इसी बीच, संपत्ति विवाद का मुद्दा भी सामने आया है। जितेंद्र पूनिया ने बताया कि रेलू राम की संपत्ति को लेकर अदालत में सेक्शन सर्टिफिकेट का मामला चल रहा था, जिसमें फैसला उनके पिता राम सिंह के पक्ष में आया था। दूसरी ओर, सोनिया ने जेल से जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण को पत्र लिखकर अपने और अपने बेटे प्रशांत के लिए रेलू राम की संपत्तियों—जिनमें लितानी मोड़ की कोठी, दौलतपुर और नांगलोई की कृषि भूमि व दुकानें शामिल हैं—पर अधिकार का दावा किया है।